डिजिटल टीम, ग्वालियर। विश्व एथलेटिक्स डे के अवसर पर ग्वालियर से खेल विकास को लेकर बड़ी और सकारात्मक पहल सामने आई है। जिला खेल एवं युवा कल्याण विभाग ने एथलेटिक्स सहित सात खेलों के लिए नए फीडर सेंटर शुरू करने का प्रस्ताव भोपाल मुख्यालय को भेजा है।
बेहतर प्लेटफॉर्म होगा तैयार
इस पहल से जिले की खेल प्रतिभाओं को न केवल उन्नत प्रशिक्षण मिलेगा, बल्कि उन्हें राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का बेहतर प्लेटफॉर्म भी तैयार होगा। अभी हाल ही में 5 मई को भेजे गए प्रस्ताव में अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय सूचना एवं प्रौद्योगिक संस्थान के सामने मुरैना रोड स्थित अंतरराष्ट्रीय खेल गांव परिसर में उपलब्ध आधुनिक संसाधनोंम, मल्टीपर्पज हॉल और सिंथेटिक एथलेटिक्स ट्रैक का उल्लेख किया गया है।
वर्तमान में यहां ‘पे एंड प्ले’ योजना के तहत खिलाड़ी नियमित अभ्यास कर रहे हैं, लेकिन फीडर सेंटर शुरू होने से प्रशिक्षण और चयन की प्रक्रिया और अधिक संगठित हो सकेगी। ये खेल गांव 50 एकड़ में फैला है।
सात खेलों को मिलेगा नया आधार
प्रस्ताव में एथलेटिक्स, जूडो, कुश्ती, ताइक्वांडो, बॉक्सिंग, फेंसिंग और वुशू को शामिल किया गया है। जिला खेल अधिकारी जोसेफ बक्सला के अनुसार, इन सेंटरों के शुरू होने से खिलाड़ियों को तकनीकी प्रशिक्षण और प्रतियोगी माहौल मिलेगा, जिससे वे राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे।
फीडर सेंटर से बनेगा अकादमी तक सीधा रास्ता
फीडर सेंटर शुरू होने से प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान और चयन की प्रक्रिया आसान होगी। इससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के खिलाड़ी सीधे राज्य स्तरीय अकादमियों से जुड़ सकेंगे। खेलों के प्रति युवाओं का रुझान बढ़ने के साथ ही जिले में खेल संस्कृति को भी मजबूती मिलेगी।
हॉकी मॉडल की सफलता से मिली प्रेरणा
प्रदेश में वर्ष 2011 में तत्कालीन खेल मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया के प्रयासों से शुरू हुए हॉकी फीडर सेंटर मॉडल ने बेहतरीन परिणाम दिए हैं। इन सेंटरों से निकले खिलाड़ी आज प्रदेश की महिला और पुरुष हॉकी अकादमियों का हिस्सा हैं। वर्तमान में मध्यप्रदेश में 20 फीडर सेंटर संचालित हैं, जिनसे प्रेरित होकर ग्वालियर में यह नया प्रस्ताव तैयार किया गया है। प्रदेश के ग्वालियर और इंदौर ऐसे जिले हैं जहां दो-दो हाकी फीडर सेंटर संचालित हो रहे है।
क्या है फीडर सेंटर योजना
मध्यप्रदेश खेल विभाग की इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य जिले स्तर पर प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को पहचानकर उन्हें प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में व्यवस्थित प्रशिक्षण देना है। चयनित खिलाड़ियों को निशुल्क खेल किट और सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं, जिससे वे बेहतर प्रदर्शन के लिए तैयार हो सकें।