
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : अब किसानों को किसी भी सरकारी योजना के लिए लंबी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। वे सिर्फ संबंधित योजना का नाम बताएंगे और एआई की मदद से आवेदन फॉर्म स्वतः भर जाएगा। प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें तुरंत डिजिटल रसीद भी मिल जाएगी।
वहीं, स्कूलों में शिक्षकों को विद्यार्थियों की रिपोर्ट कार्ड और प्रदर्शन रिपोर्ट मैन्युअली तैयार करने की जरूरत नहीं होगी। एआई खुद विद्यार्थियों के प्रदर्शन का विश्लेषण कर रिपोर्ट तैयार करेगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के ऐसे साल्यूशन इंदौर में तेजी से विकसित हो रहे हैं।
पिछले कुछ वर्षों में शहर में खेती से लेकर स्कूल, अस्पताल और उद्योग तक जनरेटिव एआई के प्रयोग शुरू हो चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कुछ वर्षों में शहर के ज्यादातर डिजिटल साल्यूशन इसी तकनीक पर आधारित होंगे और इंदौर देश के प्रमुख जनरेटिव एआई केंद्रों में अपनी जगह मजबूत करेगा।
शहर में जनरेटिव एआई और एआई एजेंट्स के विकास पर काम किया जा रहा है। स्टार्टअप्स और आईटी कंपनियां इन अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग करके उद्योगों के लिए नए समाधान तैयार कर रही हैं।जनरेटिव एआई एक ऐसी तकनीक है जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करके नई और उपयोगी सामग्री तैयार करती है, जैसे टेक्स्ट, इमेज, और वीडियो। इसके उपयोग से मार्केटिंग, कंटेंट क्रिएशन और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में कार्य हो रहा है। वहीं, एआई एजेंट्स का उपयोग कस्टमर सर्विस, हेल्थकेयर और बिजनेस आटोमेशन में किया जा रहा है।
सरकारी योजनाओं तक पहुंच : शिवांश गुप्ता ने एआई चैटबाट तैयार किया है, जो किसानों से उनकी भाषा में बात करता है। किसान केवल बोलकर अपनी समस्या बता सकते हैं। फसल, खाद, बीज, मौसम या बीमारी से जुड़े सवालों के जवाब मिलने के साथ यदि किसी सरकारी योजना का आवेदन करना हो तो एआई खुद जानकारी लेकर पूरा फॉर्म तैयार करने मे सक्षम है। इसका माडल तैयार हो चुका है और जल्द ही यह अलग-अलग प्लेटफार्म पर उपलब्ध होगा।
स्कूलों में सबसे अधिक समय छात्रों की प्रगति रिपोर्ट तैयार करने में लगता है। इसके लिए सुचित्रा बंसल ने एआई प्लेटफार्म बनाया है, जिसकी मदद से विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम, उपस्थिति, कक्षा की गतिविधियों और सीखने की गति का एनालिसिस कर कुछ ही मिनटों में पूरी रिपोर्ट तैयार की जा सकती है।इससे शिक्षकों को बच्चों पर अधिक समय देने का मौका मिलेगा।
बैंक, बीमा, ई-कामर्स और दूसरी सेवा कंपनियों के लिए भी जनरेटिव एआई आधारित समाधान तैयार किए जा रहे हैं। विश्वास गौतम का प्लेटफार्म कस्टमर से उसकी भाषा में बातचीत करेगा, समस्या समझेगा, जरूरी जानकारी जुटाएगा और कई मामलों में तुरंत समाधान भी देगा। इससे ग्राहकों का इंतजार कम होगा और कंपनियों की कार्यक्षमता बढ़ेगी।
जनरेटिव एआई का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह केवल अंग्रेजी तक सीमित नहीं है। सुभाषा अग्निहोत्री द्वारा विकसित प्लेटफार्म हिंदी और दूसरी भारतीय भाषाओं में भी काम कर रहे हैं। उपयोगकर्ता अपनी भाषा में बोलकर सवाल पूछ सकता है और उसी भाषा में जवाब पा सकता है। इससे गांवों और छोटे शहरों तक तकनीक की पहुंच आसान हो रही है।
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