इलेक्ट्रिक वाहनों की भारी डिमांड, बुकिंग के बावजूद महीनों की वेटिंग; शोरूम पहुंचते ही खाली हो रहा स्टॉक
EV Car Sales Gwalior: ई-वाहनों की यह डिमांड सिर्फ टू-व्हीलर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि फोर-व्हीलर यानी इलेक्ट्रिक कार सेगमेंट में भी यही स्थिति बनी हु...और पढ़ें
Publish Date: Sun, 09 Aug 2026 11:55:53 AM (IST)Updated Date: Sun, 09 Aug 2026 11:56:48 AM (IST)
इलेक्ट्रिक स्कूटर की खूबियों को देखता ग्राहक। नईदुनियाHighLights
- महंगे पेट्रोल और एथेनॉल ब्लेंडिंग से बढ़ा रुझान
- टू-व्हीलर पर 20 दिन और कारों पर 3 महीने तक की वेटिंग
- अन्य राज्यों में सब्सिडी के कारण ग्वालियर में सप्लाई कम
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। पेट्रोल की लगातार बढ़ती कीमतों और पारंपरिक ईंधन से जुड़ी समस्याओं के बीच शहर के ऑटोमोबाइल बाजार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। शहर में अचानक इलेक्ट्रिक स्कूटर और कारों की मांग में जबरदस्त उछाल आया है। आलम यह है कि शहर के प्रमुख ब्रांडेड शोरूम्स पर इलेक्ट्रिक स्कूटर स्टॉक में उपलब्ध ही नहीं हैं। लोग गाड़ियों की एडवांस बुकिंग करा रहे हैं, लेकिन बुकिंग के हफ्तों बीत जाने के बाद भी ग्राहकों को डिलीवरी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
ई-वाहनों की यह डिमांड सिर्फ टू-व्हीलर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि फोर-व्हीलर यानी इलेक्ट्रिक कार सेगमेंट में भी यही स्थिति बनी हुई है। ईवी कारों पर भी एक से डेढ़ महीने की वेटिंग चल रही है।
स्टॉक आते ही खाली हो रहे शोरूम
शहर के इलेक्ट्रिक व्हीकल डीलरों के अनुसार, इलेक्ट्रिक स्कूटरों की बिक्री की रफ्तार इतनी तेज है कि जैसे ही कंपनियों से नई गाड़ियों का स्टॉक शोरूम पर पहुंचता है। महज एक-दो दिनों के भीतर ही सारा स्टॉक बिक जाता है। जिन ग्राहकों ने पहले से बुकिंग करा रखी है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर डिलीवरी दी जा रही है। वहीं इलेक्ट्रिक कार सेगमेंट की बात करें तो इसकी बिक्री में भी पिछले कुछ महीनों में अभूतपूर्व बढ़ोतरी दर्ज की गई है। शहर में लोकप्रिय इलेक्ट्रिक कार मॉडल्स पर फिलहाल एक से दो महीने का लंबा वेटिंग पीरियड चल रहा है।
क्यों बढ़ रही है ई-वाहनों की मांग
- पेट्रोल की कीमतें और रनिंग कॉस्ट: पेट्रोल की मौजूदा कीमतें आम आदमी के बजट को बिगाड़ रही हैं। इसके विपरीत, इलेक्ट्रिक वाहन चलाने का प्रति किलोमीटर खर्च बेहद कम आता है, जिससे लोग रोजाना के आवागमन के लिए ईवी को तरजीह दे रहे हैं।
- पेट्रोल में एथेनॉल ब्लेंडिंग का डर: पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनाल मिश्रण के कारण कई पुराने और नए वाहनों के इंजन, फ्यूल इंजेक्टर और टैंक में खराबी आने की शिकायतें सामने आ रही हैं। वाहन चालकों को डर है कि एथेनाल युक्त पेट्रोल से उनकी गाड़ियों के इंजन की लाइफ कम हो रही है, जिससे लोग अब पेट्रोल गाड़ियों के बजाय पूरी तरह इलेक्ट्रिक व्हीकल पर शिफ्ट होना बेहतर समझ रहे हैं।
कुछ राज्यों में ईवी खरीदने पर सब्सिडी व RTO TEX में छूट, इसलिए यहां सप्लाई कम
दिल्ली, महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा, बिहार आदि में इलेक्ट्रिक वाहनों पर बेटरी क्षमताके अनुसार खरीदने पर बिल पर निश्चित छूट दी जाती है। यह छूट सीधे बैंक खाते में आती है। इसके साथ ही उत्तरप्रदेश, पंजाब, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा, तेलंगाना व केरल आदि में इलेक्ट्रिक वाहनों के रजिस्ट्रेशन पर आरटीओ टैक्स भी नहीं देना पड़ रहा है। महंगे व एथेनाल के मिलावट वाले पेट्रोल की वजह से इन राज्यों में भी डिमांड है। इसलिए भी ग्वालियर में इलेक्ट्रिक वाहनों की आपूर्ति कम हो रही है।
ब्रांडेड कंपनियों में वेटिंग तो लोकल व छोटी कंपनियों को हो रहा फायदा
ब्रांडेड कंपनियों के इलेक्ट्रिक स्कूटरों पर लोगों को 15 से 20 दिन का इंतजार करना पड़ रहा है। ऐसे में जो लोग इंतजार नहीं करना चाहते, वे लोकल व छोटी कंपनियों के कम बेटरी क्षमता वाले इलेक्ट्रिक स्कूटरों की ओर जा रहे हैं। ऐसे में इन स्कूटरों का बाजार भी बढ़ रहा है।
क्या कहते हैं शोरूम संचालक व सेल्स पर्सन
इलेक्ट्रिक कार बनाने वाली बड़ी कंपनी के सेल्स पर्सन इशान पठान का कहना है कि उनके शोरूम से वर्तमान में 60 प्रतिशत ईवी कार ही खरीदी जा रही हैं। मॉडल के हिसाब से इन पर एक महीने से तीन महीने तक की वेटिंग हैं।
ब्रांडेड कार कंपनी के शोरूम संचालक व ऑटोमोबाइल ऐसोसिएशन के अध्यक्ष हरिकांत समाधिया का कहना है कि पिछले छह महीने से इलेक्ट्रिक वाहनों के मार्केट में तेजी आई है। इसकी वजह पेट्रोल का महंगा होना और अन्य वजह भी हैं। इस वजह से लोग अब इलेक्ट्रिक वाहनों पर मूव कर रहे हैं।