
टेक्नोलॉजी डेस्क। दिल्ली के विवेक विहार में हुई हालिया हृदयविदारक घटना, जिसमें 9 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी, ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस भीषण आग की शुरुआती जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। पता चला है कि आग की शुरुआत बिल्डिंग में लगे एयर कंडीशनर (AC) में हुए एक जोरदार धमाके से हुई थी।
बढ़ती गर्मी के बीच AC अब विलासिता नहीं बल्कि जरूरत बन गया है, लेकिन थोड़ी सी लापरवाही इसे एक 'टाइम बम' में बदल सकती है। आइए समझते हैं कि आखिर एक कूलिंग मशीन मौत का कारण कैसे बन जाती है।
एक AC यूनिट में ज्वलनशील गैस और हाई-प्रेशर कंप्रेसर होता है। अगर निम्नलिखित स्थितियों में से कोई भी एक घटित होती है, तो ब्लास्ट का जोखिम बढ़ जाता है:

| क्या करें? (Dos) | क्या न करें? (Don'ts) |
| प्रोफेशनल सर्विस: हर सीजन से पहले ऑथराइज्ड टेक्नीशियन से जांच कराएं। | लोकल मैकेनिक: बिना जानकारी वाले मैकेनिक से गैस न भरवाएं। |
| स्टेबलाइजर का प्रयोग: वोल्टेज फ्लक्चुएशन से बचने के लिए इसका इस्तेमाल करें। | एक्सटेंशन बोर्ड: AC को कभी भी साधारण एक्सटेंशन या मल्टी-प्लग से न जोड़ें। |
| मशीन को ब्रेक दें: लगातार 10-12 घंटे चलाने के बाद 1 घंटे का ब्रेक जरूर दें। | अजीब आवाज को नजरअंदाज: अगर AC से खड़खड़ाहट या जलने की गंध आए, तो उसे तुरंत बंद करें। |
इलेक्ट्रिकल एक्सपर्ट्स के अनुसार, AC के लिए हमेशा एक अलग सर्किट और एमसीबी (MCB) होनी चाहिए। अगर आपके घर की वायरिंग 5-7 साल पुरानी है, तो उसे लोड टेस्ट जरूर करवाएं। विवेक विहार जैसी घटनाएं हमें याद दिलाती हैं कि तकनीक हमारे जीवन को आरामदायक बनाने के लिए है, लेकिन सुरक्षा से समझौता इसकी कीमत बढ़ा सकता है।
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