संभल हिंसा मामला: ASP अनुज चौधरी सहित 22 पुलिसकर्मियों को राहत, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने केस दर्ज करने पर लगाई रोक
Sambhal violence case: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने संभल हिंसा मामले में बड़ी राहत देते हुए पूर्व क्षेत्राधिकारी (सीओ) अनुज चौधरी समेत 22 पुलिसकर्मियों के खि ...और पढ़ें
Publish Date: Tue, 10 Feb 2026 04:58:34 PM (IST)Updated Date: Tue, 10 Feb 2026 05:00:45 PM (IST)
संभल हिंसा मामले में ASP अनुज चौधरी सहित 22 पुलिसकर्मियों को राहतHighLights
- जवाब दाखिल करने के लिए 14 दिन का समय
- राज्य सरकार की ओर से रखे गए तर्क
- एफआईआर दर्ज करने के आदेश पर रोक
डिजिटल डेस्क। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने संभल हिंसा मामले में बड़ी राहत देते हुए पूर्व क्षेत्राधिकारी (सीओ) अनुज चौधरी समेत 22 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश पर रोक लगा दी है।
यह आदेश चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (सीजेएम), संभल द्वारा नवंबर 2024 की घटना को लेकर पारित किया गया था। न्यायमूर्ति समित गोपाल की एकल पीठ ने इस आदेश पर अंतरिम रोक लगाते हुए मामले में संबंधित पक्षों से जवाब तलब किया है।
जवाब दाखिल करने के लिए 14 दिन का समय
संभल के पूर्व सीओ अनुज चौधरी और पूर्व थानाध्यक्ष अनुज तोमर द्वारा दाखिल याचिका पर कोर्ट ने 14 दिन की अंतरिम राहत प्रदान की है। वहीं, शिकायतकर्ता यामीन को भी याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए 14 दिन का समय दिया गया है।
राज्य सरकार की ओर से रखे गए तर्क
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि यामीन के बेटे आलम को लगी गोली वह नहीं थी, जिसका इस्तेमाल पुलिस बल करता है। इसके अलावा सरकार ने यह भी कहा कि सीजेएम ने बीएनएसएस की धारा 175 के प्रावधानों की अनदेखी की है।
प्रस्तुत रिपोर्ट को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया
धारा 175 के तहत किसी लोक सेवक के खिलाफ जांच के आदेश से पहले दो चरणों की प्रक्रिया अपनाना अनिवार्य है। पहले चरण में सक्षम वरिष्ठ अधिकारी से रिपोर्ट ली जानी चाहिए, जबकि दूसरे चरण में घटना की परिस्थितियों और संबंधित लोक सेवक के पक्ष अथवा बयान पर भी विचार किया जाना आवश्यक होता है। सरकार का कहना है कि सीजेएम ने पुलिस द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया।