
डिजिटल डेस्क। अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की राशि में कथित गड़बड़ी के मामले की जांच तेज हो गई है। इस प्रकरण में मिल्कीपुर निवासी अनुकल्प मिश्रा के बहनोई लवकुश मिश्रा का नाम जांच एजेंसियों के रडार पर है। बताया जा रहा है कि करीब पांच महीने पहले उसकी ड्यूटी मंदिर के गणना कक्ष में लगाई गई थी, जिसके बाद उसकी जीवनशैली में अचानक बड़ा बदलाव देखने को मिला।
खुलकर पैसा खर्च करता था
ग्रामीणों के अनुसार, लवकुश जब भी गांव लौटता था, खुलकर पैसा खर्च करता था। चर्चा है कि उसने एक बार शराब के ठेके पर ही लगभग 50 हजार रुपये उड़ा दिए थे। गांव में लोग उसकी बढ़ती आर्थिक हैसियत को लेकर सवाल उठाने लगे थे। इसी बीच तीन दिन पहले एसओजी और पुलिस-प्रशासन की टीम, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के साथ उसके गांव फगौली ठाकुरान पहुंची, जिससे इलाके में हलचल मच गई।
उधर, राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र शनिवार को अयोध्या पहुंचे, लेकिन चढ़ावा विवाद पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने रामलला के दर्शन के बाद निर्माणाधीन परियोजनाओं का निरीक्षण किया और रविवार को समीक्षा बैठक में हिस्सा लेने की बात कही।
ऐसे सामने आया चढ़ावे में गड़बड़ी का मामला
7 जून: सपा नेता और पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने राम मंदिर के दानपात्र और चढ़ावे से 5 से 7.5 करोड़ रुपये की चोरी का आरोप लगाया। उसी दिन सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी। शाम को ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने आरोपों का खंडन किया।
8 जून: चंपत राय ने दोबारा स्पष्ट किया कि मंदिर का आंतरिक ऑडिट नियमित रूप से किया जाता है और किसी भी तरह की चोरी नहीं हुई है।
9 जून: भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने मामले की जांच की मांग करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा। इसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय ने मामले का संज्ञान लिया।
10 जून: पीएमओ ने राम मंदिर ट्रस्ट से चढ़ावे और दान राशि के मिलान संबंधी विस्तृत रिपोर्ट मांगी।
11 जून: ट्रस्ट के पूर्व लेखापाल महिपाल सिंह का वीडियो सामने आया। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2021-22 में भी लाखों रुपये की चोरी पकड़ी गई थी, लेकिन सीसीटीवी फुटेज हटाकर मामला दबा दिया गया और उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया।
13 जून: बढ़ते विवाद के बीच ट्रस्ट के आग्रह पर मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन कर दिया गया।
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