आगरा में विकास के दावों के बीच दर्दनाक तस्वीर: प्रसूता और नवजात को ट्यूब पर चारपाई रखकर नदी पार कराई, गांव तक पहुंचने के लिए सड़क नहीं
देश में एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट और आधुनिक बुनियादी ढांचे का विस्तार हो रहा है, लेकिन आगरा के बाह क्षेत्र में एक ऐसा गांव भी है, जहां आज तक पहुंचने के लि...और पढ़ें
Publish Date: Fri, 14 Aug 2026 02:31:36 PM (IST)Updated Date: Fri, 14 Aug 2026 02:33:13 PM (IST)
उटंगन नदी में ट्यूब के ऊपर चारपाई रखकर प्रसूता और नवजात को घर ले जाते लोग। वीडियो ग्रैबHighLights
- सुखलाल पुरा गांव की बदहाल तस्वीर सामने आई
- गांव तक पहुंचने का सीधा रास्ता नहीं
- ग्रामीणों को उटंगन नदी पार करनी पड़ती है
डिजिटल डेस्क, आगरा। देश 79वें स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों में जुटा है। देश में एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट और आधुनिक बुनियादी ढांचे का विस्तार हो रहा है, लेकिन आगरा के बाह क्षेत्र में एक ऐसा गांव भी है, जहां आज तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क तक नहीं है। यहां ग्रामीणों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी जोखिम उठाना पड़ता है।
चंबल के बीहड़ों से सटे बसई अरेला थाना क्षेत्र के सुखलाल पुरा गांव की बदहाल तस्वीर सामने आई है। गांव तक पहुंचने का सीधा रास्ता नहीं होने के कारण ग्रामीणों को उटंगन नदी पार करनी पड़ती है। इसी बीच प्रसव के बाद एक महिला और उसके नवजात बच्चे को ट्यूब पर चारपाई रखकर नदी पार कराने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
प्रसव के बाद नवजात के साथ नदी पार करने की मजबूरी
जानकारी के मुताबिक गांव निवासी श्रीकिशन की पत्नी केशो देवी को बुधवार को प्रसव के लिए स्वजन फतेहाबाद लेकर गए थे। वहां प्रसव के बाद गुरुवार शाम करीब पांच बजे परिवार के लोग महिला और नवजात को लेकर गांव लौट रहे थे।
गांव तक पहुंचने के लिए सड़क नहीं
गांव तक पहुंचने के लिए सड़क नहीं होने के कारण परिवार को उटंगन नदी पार करनी पड़ी। नदी में पानी होने के चलते स्वजन ने एक ट्यूब के ऊपर चारपाई रखी और उसी पर प्रसूता तथा नवजात को बैठाकर नदी पार कराई। इस दौरान उनकी जान पर भी खतरा मंडरा रहा था।
इस पूरी घटना का करीब 1 मिनट 23 सेकेंड का वीडियो सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो ने गांव की बुनियादी सुविधाओं और सड़क संपर्क की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित
ग्रामीणों का कहना है कि सुखलाल पुरा तक सड़क नहीं होने का खामियाजा सिर्फ मरीजों और महिलाओं को ही नहीं, बल्कि स्कूली बच्चों को भी भुगतना पड़ रहा है। नदी पार कर स्कूल जाने में बच्चों को काफी परेशानी होती है और बरसात के दिनों में स्थिति और ज्यादा गंभीर हो जाती है।
ग्रामीण मलोदा देवी और सीमा देवी के मुताबिक गांव के लोगों ने कई बार सड़क की मांग उठाई, लेकिन अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है।
विकास के बीच सड़क का इंतजार
एक ओर जहां देश आधुनिक परिवहन सुविधाओं और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की ओर तेजी से बढ़ रहा है, वहीं सुखलाल पुरा जैसे गांवों में लोगों के लिए सड़क तक पहुंच अभी भी सपना बनी हुई है। प्रसूता और नवजात को नदी पार कराने की तस्वीर इसी जमीनी हकीकत को सामने लाती है।
ग्रामीणों की मांग है कि गांव को मुख्य मार्ग से जोड़ने के लिए जल्द से जल्द सड़क और पुलिया की व्यवस्था की जाए, ताकि मरीजों, महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को जान जोखिम में डालकर नदी पार न करनी पड़े।