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यूपी में अब फीते से नहीं होगी जमीन की पैमाइश, रोवर तकनीक से मिनटों में होगा सटीक सीमांकन

इस तकनीक से भूमि सीमांकन अधिक सटीक, पारदर्शी और समयबद्ध होगा, जिससे वर्षों से लंबित राजस्व मामलों के निस्तारण में भी तेजी आएगी।

By Digital DeskEdited By: manoj dubey
Publish Date: Wed, 08 Jul 2026 01:58:51 PM (IST)Updated Date: Wed, 08 Jul 2026 01:59:33 PM (IST)
यूपी में अब फीते से नहीं होगी जमीन की पैमाइश, रोवर तकनीक से मिनटों में होगा सटीक सीमांकन
प्रतीकात्मक फोटो।

HighLights

  1. भूमि विवादों के मामलों के निस्तारण में तेजी आने की उम्मीद
  2. अभी अधिकांश क्षेत्रों में पारंपरिक उपकरणों और फीते से की जा रही
  3. रोवर तकनीक से प्राप्त आंकड़े अत्यंत सटीक होंगे

डिजिटल डेस्क, रायबरेली। जमीन की पैमाइश में अब आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जाएगा। पारंपरिक फीते और पुराने तरीकों की जगह अत्याधुनिक रोवर (Rover) तकनीक से भूमि का सीमांकन किया जाएगा। प्रशासन का दावा है कि इससे पैमाइश पहले की तुलना में अधिक सटीक, पारदर्शी और कम समय में पूरी हो सकेगी।

नई व्यवस्था को लागू करने की तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं। जिले की सभी छह तहसीलों से एक-एक नायब तहसीलदार, एक राजस्व निरीक्षक और दो-दो लेखपालों को शासन स्तर पर विशेष प्रशिक्षण दिया जा चुका है।

भूमि विवादों के मामलों के निस्तारण में तेजी आने की उम्मीद

प्रशिक्षित अधिकारियों की टीमें अब गांव-गांव जाकर आधुनिक उपकरणों की मदद से भूमि की पैमाइश करेंगी। प्रशासन के अनुसार, नई तकनीक के इस्तेमाल से वर्षों से लंबित सीमांकन और भूमि विवादों के मामलों के निस्तारण में तेजी आने की उम्मीद है। साथ ही किसानों और अन्य भू-स्वामियों को बार-बार तहसीलों के चक्कर लगाने की आवश्यकता भी काफी हद तक कम हो जाएगी।


अभी कई क्षेत्रों में पारंपरिक उपकरणों और फीते से हो रही

अब तक अधिकांश क्षेत्रों में जमीन की पैमाइश पारंपरिक उपकरणों और फीते से की जाती रही है, जिससे कई बार सीमांकन को लेकर विवाद खड़े हो जाते थे। ऐसे मामलों की बड़ी संख्या राजस्व विभाग और न्यायालयों में लंबित है। रोवर तकनीक लागू होने के बाद इन विवादों में कमी आने की संभावना जताई जा रही है।

रोवर तकनीक से प्राप्त आंकड़े अत्यंत सटीक होंगे

राजस्व अधिकारियों का कहना है कि रोवर तकनीक से प्राप्त आंकड़े अत्यंत सटीक होंगे। इससे खेतों, प्लॉटों और अन्य भूमि का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा सकेगा। पैमाइश के दौरान मानवीय त्रुटियों की संभावना भी काफी कम होगी, जिससे विवादित मामलों में निष्पक्ष और प्रमाणिक रिपोर्ट तैयार करना आसान होगा।

जानिए क्या है रोवर तकनीक?

रोवर तकनीक ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (GNSS) आधारित आधुनिक सर्वे प्रणाली है। इसमें विशेष रोवर रिसीवर उपग्रहों से लगातार सिग्नल प्राप्त करता है और सीओआरएस (CORS) नेटवर्क से जुड़कर जमीन की वास्तविक स्थिति का बेहद सटीक निर्धारण करता है।

यह प्रणाली डिजिटल मानचित्र और राजस्व अभिलेखों का मिलान करते हुए वैज्ञानिक और प्रमाणिक सीमांकन सुनिश्चित करती है। इससे भूमि पैमाइश की पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और तकनीक आधारित बन जाती है।

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