जैव विविधता दिवस: आगरा के आसपास बसी है वाइल्ड लाइफ की अनोखी दुनिया, जहां दिखते हैं कई संकटग्रस्त जीव
ताजमहल के लिए दुनियाभर में मशहूर आगरा सिर्फ ऐतिहासिक धरोहरों का शहर नहीं, बल्कि जैव विविधता का भी बड़ा केंद्र बनता जा रहा है। ...और पढ़ें
Publish Date: Fri, 22 May 2026 03:22:06 PM (IST)Updated Date: Fri, 22 May 2026 03:24:29 PM (IST)
HighLights
- चंबल नदी की घाटियों से अरावली की पहाड़ियों तक वन्यजीवों का संसार
- विशेषज्ञों ने आगरा की समृद्ध जैव विविधता को खास बताया
- चंबल से सूरसरोवर तक फैला अनोखा ईको-सिस्टम
डिजिटल डेस्क, आगरा। ताजमहल के लिए दुनियाभर में मशहूर आगरा सिर्फ ऐतिहासिक धरोहरों का शहर नहीं, बल्कि जैव विविधता का भी बड़ा केंद्र बनता जा रहा है। अगर आप प्रकृति और वाइल्ड लाइफ प्रेमी हैं, तो आगरा और उसके आसपास फैले जंगल, नदी तट, वेटलैंड और पहाड़ी इलाके आपको एक अलग ही दुनिया का एहसास कराते हैं।
चंबल नदी की घाटियों से लेकर अरावली की पहाड़ियों तक फैले इस क्षेत्र में कई ऐसे दुर्लभ और संकटग्रस्त जीव-जंतु पाए जाते हैं, जिन्हें दुनिया भर में संरक्षण की जरूरत मानी जा रही है। अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस (22 मई) के मौके पर विशेषज्ञों ने आगरा की समृद्ध जैव विविधता को खास बताया है।
चंबल से सूरसरोवर तक फैला अनोखा ईको-सिस्टम
ईकोलॉजिस्ट डॉ केपी सिंह के मुताबिक आगरा के दक्षिण-पूर्व में स्थित राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य( National Chambal Sanctuary) क्षेत्र जैव विविधता का बड़ा केंद्र है। यहां चंबल नदी, उसके बालुई तट और रेत के मैदान जलीय जीवों, पक्षियों और स्तनधारियों के लिए आदर्श आवास बनाते हैं।
वहीं आगरा के उत्तर-पूर्व में स्थित सूर सरोवर पक्षी अभयारण्य (Soor Sarovar Bird Sanctuary) और यमुना किनारे के जंगलों में प्रवासी और स्थानीय पक्षियों की कई दुर्लभ प्रजातियां देखी जाती हैं। दूसरी ओर जगनेर, तांतपुर और फतेहपुर सीकरी के पथरीले और अर्ध-शुष्क क्षेत्र अलग तरह की वन्यजीव विविधता को समेटे हुए हैं।
आगरा में मिलते हैं कई संकटग्रस्त वन्यजीव
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की शोधार्थी निधि यादव के अनुसार चंबल नदी में भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव डॉल्फिन पाया जाता है, जिसे संकटग्रस्त श्रेणी में रखा गया है। इसके अलावा चंबल अभयारण्य और जगनेर-तांतपुर क्षेत्र में भारतीय तेंदुआ और धारीदार लकड़बग्घा की मौजूदगी भी दर्ज की गई है। बाह क्षेत्र में फिसिंग कैट जबकि अछनेरा और फतेहपुर सीकरी इलाके में भारतीय पैंगोलिन देखे जा चुके हैं।