यूपी में रजिस्ट्री में आधार-पैन अनिवार्य, रजिस्ट्री में गवाहों के मोबाइल नंबर का आधार से लिंक होना भी जरूरी
UP News: उत्तर प्रदेश में अब जमीन-जायदाद की रजिस्ट्री के दौरान क्रेता और विक्रेता दोनों के लिए आधार और पैन कार्ड देना अनिवार्य कर दिया गया है। ...और पढ़ें
Publish Date: Sun, 08 Feb 2026 05:01:16 PM (IST)Updated Date: Sun, 08 Feb 2026 05:02:29 PM (IST)
यूपी में रजिस्ट्री में आधार-पैन अनिवार्यHighLights
- दोषियों की पहचान और गिरफ्तारी में आसान होगी
- ब्लैक मनी पर रोक लगाने में मिलेगी मदद
- संपत्ति लेन-देन में पारदर्शिता आएगी
डिजिटल डेस्क। कोई भी व्यक्ति अब आपकी संपत्ति को फर्जी तरीके से बेच नहीं सकेगा। यदि ऐसा करने की कोशिश की गई, तो दोषियों को जेल जाना तय है। क्योंकि उत्तर प्रदेश में अब जमीन-जायदाद की रजिस्ट्री के दौरान क्रेता और विक्रेता दोनों के लिए आधार और पैन कार्ड देना अनिवार्य कर दिया गया है।
इतना ही नहीं, रजिस्ट्री में गवाहों के मोबाइल नंबर का आधार से लिंक होना भी जरूरी होगा। बिना इस प्रक्रिया के रजिस्ट्री नहीं की जाएगी। निबंधन विभाग ने इस नियम को प्रभावी रूप से लागू कर दिया है।
दोषियों की पहचान और गिरफ्तारी आसान होगी
आधार और पैन की अनिवार्यता से संपत्ति से जुड़े सभी पक्षों की पहचान स्पष्ट होगी और रजिस्ट्री दस्तावेजों के साथ असली व्यक्ति का पहचान प्रमाण सुरक्षित रूप से दर्ज रहेगा। किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी की स्थिति में दोषियों की पहचान और गिरफ्तारी आसान होगी।
पैन कार्ड को अनिवार्य करने का निर्णय गृह विभाग के निर्देशों के अनुरूप लिया गया है। सूत्रों के अनुसार, भारत-नेपाल सीमा से सटे क्षेत्रों में अचल संपत्ति के पंजीकरण के दौरान हो रहे वित्तीय अपराधों को रोकने और राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पैन को अनिवार्य रूप से लिंक कराने के दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
बेनामी संपत्तियों का चलन तेजी से बढ़ा है
इसी क्रम में महानिरीक्षक निबंधन नेहा शर्मा ने प्रदेश के सभी उप-निबंधक कार्यालयों को निर्देश दिए हैं कि रजिस्ट्री प्रक्रिया में आधार और पैन कार्ड को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए। सीमावर्ती क्षेत्रों में बेनामी संपत्तियों का चलन तेजी से बढ़ा है, जहां असली मालिक न होने के बावजूद स्थानीय लोगों के नाम पर दस्तावेज तैयार कर जमीन का क्रय-विक्रय किया गया। इससे कई लोग अवैध रूप से लाभान्वित हुए हैं।
ब्लैक मनी पर रोक लगाने में मिलेगी मदद
ब्लैक मनी पर रोक लगाने के उद्देश्य से यह कदम बेहद अहम माना जा रहा है। अब तक कई लोग दूसरे के नाम पर जमीन खरीदकर काले धन का इस्तेमाल करते थे, लेकिन नए नियमों के लागू होने के बाद यह प्रक्रिया आसान नहीं रहेगी। विक्रेता को अपनी वास्तविक पहचान उजागर करनी होगी और पैन कार्ड प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
इस व्यवस्था से संपत्ति की रजिस्ट्री में होने वाले फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी और कोर्ट में चल रहे मुकदमों की संख्या में भी कमी आएगी। वर्तमान समय में जमीन-जायदाद से जुड़े फर्जी क्रय-विक्रय के मामले न्यायालयों में सबसे अधिक हैं।
संपूर्ण समाधान दिवस पर भी अक्सर शिकायतें आती हैं कि किसी ने उनकी जमीन की फर्जी रजिस्ट्री करा ली। कई बार खरीदार भी ऐसे मामलों में फंस जाते हैं, जहां दस्तावेजों में हेरफेर कर असली काश्तकार को हटाकर किसी अन्य को मालिक बना दिया जाता है।
संपत्ति लेन-देन में पारदर्शिता आएगी
नए नियमों के जरिए न केवल संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि बेनामी संपत्तियों के निर्माण पर भी प्रभावी रोक लगेगी। यह कदम आम जनता के हित के साथ-साथ देश की आर्थिक सुरक्षा के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। रजिस्ट्री में आधार और पैन कार्ड की अनिवार्यता से संपत्ति लेन-देन में पारदर्शिता आएगी और वित्तीय अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा। इससे समाज में फैले भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े पर भी सख्त अंकुश लगेगा।