इलाहाबाद हाई कोर्ट की अहम टिप्पणी: तकनीकी कारणों से किसी छात्र की शिक्षा बाधित नहीं की जा सकती
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शिक्षा के अधिकार को लेकर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि किसी छात्र की पढ़ाई को केवल तकनीकी आधारों पर बाधित नहीं किया ज ...और पढ़ें
Publish Date: Sat, 07 Feb 2026 11:18:36 AM (IST)Updated Date: Sat, 07 Feb 2026 11:18:36 AM (IST)
इलाहाबाद हाई कोर्टHighLights
- सीबीएसई ने अनुच्छेद 227 के तहत दायर की थी याचिका
- स्कूल ने भी दी थी चुनौती, लेकिन आगे कार्रवाई नहीं की
- अस्थायी प्रवेश और परीक्षा में बैठने की अनुमति
डिजिटल डेस्क। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शिक्षा के अधिकार को लेकर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि किसी छात्र की पढ़ाई को केवल तकनीकी आधारों पर बाधित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) की याचिका पर सुनवाई करते हुए बुलंदशहर के एक छात्र को कक्षा 11 में अस्थायी रूप से प्रवेश देने का निर्देश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति समित गोपाल की एकलपीठ ने पारित किया। मामले की अगली सुनवाई 9 मार्च 2026 को निर्धारित की गई है।
सीबीएसई ने अनुच्छेद 227 के तहत दायर की थी याचिका
सीबीएसई ने संविधान के अनुच्छेद 227 के अंतर्गत यह याचिका दायर कर जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड, बुलंदशहर द्वारा 22 सितंबर 2025 को पारित आदेश तथा अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो कोर्ट) द्वारा 17 नवंबर 2025 को दिए गए अपीलीय आदेश को चुनौती दी थी।
इन आदेशों के माध्यम से दिल्ली पब्लिक स्कूल, यमुनापुरम को छात्र को सात दिनों के भीतर कक्षा 11 में प्रवेश देने के निर्देश दिए गए थे।
स्कूल ने भी दी थी चुनौती, लेकिन आगे कार्रवाई नहीं की
सीबीएसई का तर्क था कि जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड की कार्यवाही में उसे पक्षकार नहीं बनाया गया, जबकि आदेश का सीधा प्रभाव बोर्ड पर पड़ता है। हालांकि, अदालत ने यह भी नोट किया कि संबंधित स्कूल ने भी इन आदेशों को चुनौती दी थी, लेकिन अपील खारिज होने के बाद स्कूल ने कोई आगे की कानूनी कार्रवाई नहीं की।
कोर्ट की टिप्पणी
कोर्ट ने कहा कि यह निर्विवाद तथ्य है कि छात्र कक्षा 10वीं उत्तीर्ण कर चुका है और बोर्ड व स्कूल के नियमों के अनुसार कक्षा 11 में प्रवेश के लिए पूरी तरह पात्र है। केवल किसी आपराधिक मामले में कथित संलिप्तता के आधार पर छात्र को शिक्षा से वंचित करना उचित नहीं है।
अस्थायी प्रवेश और परीक्षा में बैठने की अनुमति
हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि छात्र को चार दिनों के भीतर, और अधिकतम सात दिनों के अंदर कक्षा 11 में अस्थायी रूप से प्रवेश दिया जाए। साथ ही उसे नियमित परीक्षाओं में शामिल होने की अनुमति भी दी जाए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जारी की जाने वाली मार्कशीट में यह उल्लेख होगा कि प्रवेश अस्थायी है और रिट याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा।