
डिजिटल डेस्क। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को अयोध्या दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वह रामलला के दर्शन-पूजन करेंगे, लेकिन हर बार उनकी आगवानी श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय करते थे। इस बार वह सीएम योगी के आसपास भी नहीं भटकेंगे। उनकी जगह किसी अन्य प्रतिनिधि को नामित करने का अनुरोध किया गया है।
आपको बता दें कि राम मंदिर की दान पेटिकाओं में कथित अनियमितताओं का मुद्दा देशभर में छाया हुआ है। इसमें चंपत राय के करीबियों पर गंभीर आरोप लग रहे हैं। ऐसे में उनसे योगी आदित्यनाथ सरकार दूरी बनाते दिख रही है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अयोध्या प्रवास के दौरान रायगंज स्थित दिगम्बर जैन मंदिर में आयोजित पंचकल्याणक महोत्सव में भाग लेंगे। इसके अलावा भगवान आदिनाथ मंदिर के मुख्य द्वार और भगवान भरत के 100 पुत्रों को समर्पित मंदिर का लोकार्पण भी करेंगे। कार्यक्रम के दौरान उनका रामलला के दर्शन और पूजन का भी निर्धारित कार्यक्रम है।
सूत्रों के मुताबिक, जिला प्रशासन की ओर से जारी सुरक्षा और प्रोटोकॉल संबंधी निर्देशों में चंपत राय से कहा है कि मुख्यमंत्री के मंदिर कार्यक्रम की व्यवस्थाओं के लिए वह किसी अन्य व्यक्ति को अपना प्रतिनिधि नामित करें। इसकी जानकारी संबंधित ड्यूटी मजिस्ट्रेट को उपलब्ध कराने को भी कहा है।
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यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब राम मंदिर की दान पेटिकाओं और चढ़ावे को लेकर कथित अनियमितताओं के आरोपों पर चर्चा चल रही है। इसी कारण चंपत राय को मुख्यमंत्री के कार्यक्रम से दूर रखने को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। हालांकि प्रशासन या श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इस संबंध में कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी नहीं किया है।
अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अयोध्या दौरे और राम मंदिर में होने वाले कार्यक्रम पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों और श्रद्धालुओं के बीच यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि प्रोटोकॉल में किए गए इस बदलाव के पीछे वास्तविक कारण क्या हैं।