यूपी सरकार ने रणनीति में किया बड़ा बदलाव, अब जिला प्रशासन संभालेगा ‘सिटी हीट एक्शन प्लान’ की जिम्मेदारी
उत्तर प्रदेश में बढ़ती गर्मी और हीटवेव के खतरे से निपटने के लिए राज्य सरकार ने ‘सिटी हीट एक्शन प्लान’ की रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। ...और पढ़ें
Publish Date: Tue, 16 Jun 2026 03:53:41 PM (IST)Updated Date: Tue, 16 Jun 2026 03:53:41 PM (IST)
HighLights
- 2024 में ‘सिटी हीट एक्शन प्लान’ की रूपरेखा की थी तैयार
- 11 प्रमुख शहरों के लिए नए सिरे से तैयार करने के निर्देश
- संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित करना होगा
डिजिटल डेस्क, लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बढ़ती गर्मी और हीटवेव के खतरे से निपटने के लिए राज्य सरकार ने ‘सिटी हीट एक्शन प्लान’ की रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूपीएसडीएमए) ने अब जिलाधिकारियों को गर्मी से बचाव के लिए विस्तृत और व्यवहारिक कार्ययोजना तैयार कर भेजने के निर्देश दिए हैं।
पहले इस योजना के तहत रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी स्वयंसेवी संस्थाओं (एनजीओ), पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी संस्थाओं और विशेषज्ञ एजेंसियों को दी जानी थी। इसके लिए प्रत्येक जिले में 11 लाख रुपये तक खर्च करने का प्रावधान भी किया गया था। हालांकि, जिलों से प्राप्त रिपोर्टों के परीक्षण के बाद यूपीएसडीएमए ने उन्हें संतोषजनक नहीं माना और पूरी प्रक्रिया को नए सिरे से शुरू करने का निर्णय लिया है।
2024 में ‘सिटी हीट एक्शन प्लान’ की रूपरेखा की थी तैयार
दरअसल, यूपीएसडीएमए ने वर्ष 2024 में ‘सिटी हीट एक्शन प्लान’ की रूपरेखा तैयार की थी। राज्य सरकार की मंजूरी मिलने के बाद इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने की तैयारी शुरू हुई। शुरुआती चरण में आगरा, लखनऊ, गोरखपुर और अयोध्या समेत चुनिंदा शहरों के लिए हीटवेव के प्रभाव को कम करने की कार्ययोजना बनाई जानी थी। इसके साथ ही शहरी क्षेत्रों में हरित क्षेत्र और छोटे-छोटे वन विकसित करने की योजना भी प्रस्तावित थी।
11 प्रमुख शहरों के लिए नए सिरे से तैयार करने के निर्देश
अब प्राधिकरण ने लखनऊ, कानपुर, आगरा, मेरठ, गोरखपुर, प्रयागराज, वाराणसी, बरेली, मुरादाबाद, अयोध्या और गाजियाबाद समेत 11 प्रमुख शहरों के लिए नए सिरे से ‘सिटी हीट एक्शन प्लान’ तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा अन्य जिलों को भी स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप हीट एक्शन प्लान तैयार करने को कहा गया है।
संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित करना होगा
यूपीएसडीएमए ने स्पष्ट किया है कि कार्ययोजना तैयार करने में जिला प्रशासन को आपदा प्रबंधन, नगर निगम, नगरीय निकाय, कृषि, बागवानी, मौसम विभाग तथा अन्य संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित करना होगा। साथ ही स्थानीय विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों के विशेषज्ञों की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी।
जिला स्तर पर समितियों का गठन किया गया है
इस उद्देश्य से जिला स्तर पर समितियों का गठन किया गया है, जो हीटवेव के जोखिम का आकलन कर प्रभावी रोकथाम और राहत उपायों की विस्तृत कार्ययोजना तैयार करेंगी। सरकार का मानना है कि स्थानीय जरूरतों और विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर तैयार योजना गर्मी से होने वाले नुकसान को कम करने में अधिक कारगर साबित होगी।