
डिजिटल डेस्क। देश को दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के संकल्प के साथ उत्तर प्रदेश सरकार ने इस खरीफ सीजन के लिए एक महायोजना तैयार की है। राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के तहत इस साल खरीफ फसलों में दालों (उर्द, मूंग और अरहर) के उत्पादन को अभूतपूर्व गति दी जाएगी। कृषि विभाग ने इस बार दलहनी फसलों के कुल रकबे में 3.11 लाख हेक्टेयर की रिकॉर्ड बढ़ोतरी करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।
किसानों को इस मिशन से जोड़ने और बोआई के लिए प्रोत्साहित करने के लिए सरकार की ओर से दलहन का 49,129 क्विंटल उन्नत बीज भारी अनुदान (सब्सिडी) पर वितरित किया जाएगा।
कृषि विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष खरीफ सीजन में प्रदेश के भीतर 8,59,000 हेक्टेयर क्षेत्र में दलहनी फसलों की बोआई की गई थी। इस साल विभाग ने अपनी रणनीति बदलते हुए इस दायरे को बढ़ाकर 11,70,000 हेक्टेयर तक पहुंचाने का रोडमैप तैयार किया है।
इस मिशन के तहत उर्द, अरहर और मूंग तीनों मुख्य फसलों का उत्पादन क्षेत्र बढ़ाया जा रहा है, जिसमें सबसे ज्यादा फोकस उर्द की खेती पर है। उर्द के रकबे में अकेले 1.60 लाख हेक्टेयर की वृद्धि का लक्ष्य है। वहीं अरहर में 1.32 लाख हेक्टेयर और मूंग के क्षेत्र में 19 हजार हेक्टेयर की बढ़ोतरी दर्ज कराने की तैयारी है।
| फसल (Crop) | वर्ष 2025 का रकबा | वर्ष 2026 का लक्ष्य | शुद्ध बढ़ोतरी (Growth) |
| उर्द | 4,30,000 | 5,90,000 | +1,60,000 |
| अरहर | 3,68,000 | 5,00,000 | +1,32,000 |
| मूंग | 61,000 | 80,000 | +19,000 |
| कुल रकबा | 8,59,000 | 11,70,000 | +3,11,000 |
किसानों पर आर्थिक बोझ न पड़े और वे उच्च गुणवत्ता वाले प्रमाणित बीजों का उपयोग कर सकें, इसके लिए सरकार 50 प्रतिशत की सब्सिडी दे रही है। विभाग द्वारा तय की गई बीज वितरण की रूपरेखा इस प्रकार है:
उर्द: किसानों को दलहन आत्मनिर्भरता के तहत 23,958 क्विंटल उर्द के बीज बांटे जाएंगे।
अरहर: पैदावार बढ़ाने के लिए 21,225 क्विंटल अरहर का उन्नत बीज सब्सिडी पर मिलेगा।
मूंग: छोटे और सीमांत किसानों की पहुंच आसान बनाने के लिए 3,946 क्विंटल मूंग बीज का वितरण होगा।
दलहन के अलावा, सरकार इस खरीफ सीजन में तिलहन और मोटे अनाजों (Millets) के उत्पादन को भी नया आयाम दे रही है।
खरीफ सीजन की बोआई शुरू होने से पहले किसान भाई अपने नजदीकी राजकीय कृषि बीज भंडार या सहकारी समितियों में पंजीकरण करा लें, ताकि समय पर अनुदानित दरों पर प्रमाणित बीज प्राप्त किए जा सकें।