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राम मंदिर चढ़ावा गबन मामला: दान किए गए कुछ आभूषणों के भी गायब होने के संकेत, चंपत राय समेत 14 लोग सवालों के घेरे में, FIR सहित कई बड़ी सिफारिशें

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन (Ram Mandir donation embezzlement case) और वित्तीय अनियमितताओं की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) ने अपन...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: manoj dubey
Publish Date: Tue, 23 Jun 2026 05:34:19 PM (IST)Updated Date: Tue, 23 Jun 2026 05:45:36 PM (IST)
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राम मंदिर चढ़ावा गबन मामला: दान किए गए कुछ आभूषणों के भी गायब होने के संकेत, चंपत राय समेत 14 लोग सवालों के घेरे में, FIR सहित कई बड़ी सिफारिशें

HighLights

  1. गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव को सौंपी गई 20 पन्नों की रिपोर्ट
  2. चढ़ावे की नकदी के साथ आभूषणों की गड़बड़ी का भी उल्लेख
  3. पांच वर्षों के चढ़ावे और वित्तीय लेन-देन का ऑडिट कराने का सुझाव

डिजिलट डेस्क, अयोध्या/ लखनऊ। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन (Ram Mandir donation embezzlement case) और वित्तीय अनियमितताओं की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट शासन को सौंप दी है।

मंगलवार को गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय प्रसाद को सौंपी गई 20 पन्नों की रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख करते हुए एफआईआर दर्ज कराने, ट्रस्ट के पुनर्गठन तथा मंदिर प्रशासन को पेशेवर ढंग से संचालित करने के लिए वरिष्ठ अधिकारी को मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) नियुक्त करने की सिफारिश की गई है।

चढ़ावे की नकदी के साथ आभूषणों की गड़बड़ी का भी उल्लेख

सूत्रों के अनुसार, SIT की जांच में केवल नकदी गबन ही नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए कुछ आभूषणों के गायब होने के संकेत भी मिले हैं। रिपोर्ट में चढ़ावे की गणना प्रक्रिया, कर्मचारियों की भर्ती, निगरानी व्यवस्था और ट्रस्ट से जुड़े कुछ पदाधिकारियों, बैंक अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं।


गौरतलब है कि 7 जून को मामला सार्वजनिक होने के बाद 13 जून को राज्य सरकार ने ट्रस्ट के अनुरोध पर लखनऊ मंडलायुक्त डॉ. विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय SIT का गठन किया था। टीम ने 15 जून से जांच शुरू की थी और सरकार ने सात दिनों के भीतर प्रारंभिक रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे।

150 से अधिक लोगों से पूछताछ

रिपोर्ट में बताया गया है कि SIT ने अब तक ट्रस्ट, बैंक और मंदिर प्रशासन से जुड़े करीब 150 लोगों से पूछताछ की है। इनमें अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, मनीष यादव, राजेश पाठक, रमाशंकर, अविनाश शुक्ल, कृष्णदेव तिवारी और सुभाष श्रीवास्तव समेत कई प्रमुख नाम शामिल हैं।

सूत्रों का दावा है कि जांच में ट्रस्ट महासचिव चंपत राय, ट्रस्ट सदस्य डॉ. अनिल मिश्र, व्यवस्थापक गोपाल राव और रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू सहित कुल 14 लोगों को आरोपी के रूप में चिन्हित किया गया है। जांच के दौरान दर्ज किए गए कई बयान ट्रस्ट के उपलब्ध अभिलेखों से मेल नहीं खाए, जिससे संदेह और गहरा हुआ है।

पांच वर्षों के चढ़ावे के ऑडिट की सिफारिश

SIT ने मंदिर में पिछले पांच वर्षों के चढ़ावे और वित्तीय लेन-देन का विशेष ऑडिट कराने का सुझाव दिया है। सूत्रों के मुताबिक राज्य सरकार रिपोर्ट को जल्द ही केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेज सकती है, जिसके बाद ट्रस्ट के पुनर्गठन और जिम्मेदार पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई पर निर्णय लिया जा सकता है।

दो करोड़ रुपये की बरामदगी, कई खामियां उजागर

जांच के दौरान लवकुश, अवनीश, अनुकल्प, करुणे और रामशंकर उर्फ टिन्नू की निशानदेही पर करीब दो करोड़ रुपये की बरामदगी की गई है। SIT को दानपात्रों की चाबियां रामशंकर यादव के कब्जे में मिलीं। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि कुछ सेवादारों को कथित गबन की जानकारी पहले से थी।

यह भी पढ़ें- कौन हैं चंपत राय? राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में SIT की प्रारंभिक जांच में आया नाम, जानें शिक्षक से श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट के महासचिव तक का सफर

मंदिर प्रबंधन में बड़े बदलाव की सिफारिश

रिपोर्ट में मंदिर प्रशासन को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए कई सुझाव दिए गए हैं। इनमें शामिल हैं-

  • मंदिर प्रबंधन को पेशेवर प्रणाली के तहत संचालित करना।
  • दान राशि की साप्ताहिक ऑडिट व्यवस्था लागू करना।
  • प्रतिदिन प्राप्त चढ़ावे का डिजिटल और लिखित रिकॉर्ड तैयार करना।
  • सीसीटीवी फुटेज का डेटा स्टोरेज 45 दिन से बढ़ाकर 180 दिन करना।
  • जांच पूरी होने तक आरोपितों की आवाजाही पर निगरानी रखना।
  • कर्मचारियों की नियुक्ति और गणना प्रक्रिया की स्वतंत्र समीक्षा कराना शामिल है।

कमीशनखोरी और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल

सूत्रों के अनुसार, जांच रिपोर्ट में चढ़ावा गबन के साथ-साथ कथित कमीशनखोरी के संकेत मिलने का भी उल्लेख किया गया है। कर्मचारियों की नियुक्ति, चढ़ावे की गणना और सुरक्षा व्यवस्था में हेरफेर की आशंका जताई गई है। रिपोर्ट में बिना तलाशी के मंदिर कर्मियों की आवाजाही और निगरानी तंत्र की कमजोरियों को भी गंभीर चिंता का विषय बताया गया है।

SIT अध्यक्ष डॉ. विजय विश्वास पंत ने पुष्टि की है कि प्रारंभिक गोपनीय जांच रिपोर्ट शासन को सौंप दी गई है। उन्होंने कहा कि अब तक जांच में सामने आए तथ्यों और साक्ष्यों को रिपोर्ट का हिस्सा बनाया गया है तथा आवश्यकता पड़ने पर जांच का दायरा आगे भी बढ़ाया जा सकता है।