राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद: SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट में चंपत राय समेत 14 लोग जिम्मेदार, ट्रस्ट ने की है बड़ी सिफारिश
राम मंदिर चढ़ावा चोरी (Ram Mandir Donation Theft) और वित्तीय अनियमितताओं के मामले की जांच कर रहे विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार क ...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 22 Jun 2026 12:21:35 PM (IST)Updated Date: Mon, 22 Jun 2026 12:22:53 PM (IST)
राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद: SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट में चंपत राय समेत 14 लोग जिम्मेदार।HighLights
- CEO नियुक्त करने जैसी महत्वपूर्ण सिफारिशें
- छह दिन की जांच में सामने आईं कई अनियमितताएं
- कुल 14 लोगों के लिखित बयान भी दर्ज किए गए
डिजिटल डेस्क, अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी (Ram Mandir Donation Theft) और वित्तीय अनियमितताओं के मामले की जांच कर रहे विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार कर ली है। सूत्रों के मुताबिक, रिपोर्ट में श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय समेत 14 लोगों को विभिन्न स्तरों पर जिम्मेदार माना गया है।
एसआईटी (SIT) सोमवार को यह रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपेगी और विस्तृत जांच के लिए अतिरिक्त समय भी मांगेगी।
CEO नियुक्त करने जैसी महत्वपूर्ण सिफारिशें
जानकारी के अनुसार, जांच के दौरान कई प्रशासनिक और वित्तीय खामियां सामने आई हैं। रिपोर्ट में ट्रस्ट के पुनर्गठन, पेशेवर प्रबंधन व्यवस्था लागू करने और काशी विश्वनाथ धाम की तर्ज पर मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) नियुक्त करने जैसी महत्वपूर्ण सिफारिशें की गई हैं।
छह दिन की जांच में सामने आईं कई अनियमितताएं
राज्य सरकार द्वारा गठित SIT ने पिछले सप्ताह जांच शुरू की थी। जांच टीम ने ट्रस्ट महासचिव चंपत राय, व्यवस्थापक गोपाल राव और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों से पूछताछ की। इसके अलावा मंदिर की नकदी गणना व्यवस्था, दानपात्र प्रबंधन और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़े करीब 150 लोगों के बयान दर्ज किए गए।
कुल 14 लोगों के लिखित बयान भी दर्ज किए गए
जांच के दौरान ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र के बयान का मिलान रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के बयान से किया गया। दोनों के बयानों में कथित तौर पर विसंगतियां मिलने के बाद लगातार तीन दिनों तक गहन पूछताछ की गई। सूत्रों के अनुसार, अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, मनीष यादव, राजेश पाठक, रमाशंकर, अविनाश शुक्ल, कृष्णदेव तिवारी और सुभाष श्रीवास्तव समेत ट्रस्ट एवं बैंकिंग व्यवस्था से जुड़े कुल 14 लोगों के लिखित बयान भी दर्ज किए गए हैं।
दानपात्र की चाबियां एक व्यक्ति के पास मिलने पर उठे सवाल
SIT की जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि मंदिर के दानपात्रों की चाबियां रामशंकर यादव टिन्नू के पास थीं। जांच टीम को यह भी संकेत मिले कि कुछ सेवादारों को कथित गबन की जानकारी पहले से थी। इन तथ्यों को रिपोर्ट में गंभीर प्रशासनिक चूक के रूप में दर्ज किया गया है।
शनिवार को प्रारंभिक जांच पूरी करने के बाद SIT के सदस्य लखनऊ लौट गए। अब सोमवार को मुख्यमंत्री को रिपोर्ट सौंपने के बाद टीम अयोध्या पहुंचकर आगे की जांच जारी रखेगी और अन्य संबंधित लोगों के बयान भी दर्ज करेगी।
ट्रस्ट के पुनर्गठन पर जोर
सूत्रों के मुताबिक, SIT ने अपनी रिपोर्ट में वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए कई अहम सुझाव दिए हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पुनर्गठन और जिम्मेदारियों के स्पष्ट निर्धारण की सिफारिश है।
SIT की प्रमुख सिफारिशें
- श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का पुनर्गठन किया जाए।
- ट्रस्ट के सभी सदस्यों की जवाबदेही स्पष्ट रूप से तय की जाए।
- किसी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी को CEO नियुक्त किया जाए।
- विस्तृत जांच के लिए SIT को अतिरिक्त समय दिया जाए।
- मंदिर प्रबंधन में पेशेवर प्रणाली लागू की जाए।
- दानराशि की गणना का साप्ताहिक ऑडिट कराया जाए।
- प्रतिदिन प्राप्त होने वाली नकदी का नियमित रिकॉर्ड रखा जाए।
- सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।
- CCTV फुटेज का स्टोरेज 45 दिन से बढ़ाकर 180 दिन किया जाए।
- जांच पूरी होने तक चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्र, गोपाल राव समेत अन्य जिम्मेदार पदाधिकारियों को अयोध्या छोड़ने की अनुमति न दी जाए।
हालांकि, SIT की यह अभी प्रारंभिक रिपोर्ट है। अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच और आगे की पूछताछ के बाद ही सामने आएंगे। रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद राज्य सरकार इस मामले में आगे की कार्रवाई को लेकर निर्णय ले सकती है।