राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में विश्व हिंदू परिषद ने अपनाया सख्त रुख, FIR में देरी पर उठाए सवाल, प्रशासन के सामने रखी चार मांगें
अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन (Ram Mandir Offering theft Controversy) के मामले ने नया मोड़ ले लिया है।
Publish Date: Thu, 25 Jun 2026 02:32:34 PM (IST)Updated Date: Thu, 25 Jun 2026 02:36:04 PM (IST)
HighLights
- प्रशासन से तत्काल और कठोर कार्रवाई की मांग
- अब तक एफआईआर दर्ज न होने पर खड़े किए सवाल
- करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी है, ढिलाई स्वीकार नहीं
डिजिटल डेस्क, लखनऊ। अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन (Ram Mandir Offering theft Controversy) के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने इस प्रकरण में अब खुलकर हस्तक्षेप करते हुए प्रशासन से तत्काल और कठोर कार्रवाई की मांग की है।
विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट साझा कर मामले में अब तक एफआईआर दर्ज न होने पर सवाल खड़े किए हैं।
प्रशासन से शीघ्र कानूनी कार्रवाई करने की अपील की
आलोक कुमार द्वारा साझा किए गए पोस्टर में भव्य राम मंदिर की तस्वीर के साथ प्रशासन से शीघ्र कानूनी कार्रवाई करने की अपील की गई है। विहिप का कहना है कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में किसी भी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जा सकती।
विहिप ने रखीं चार प्रमुख मांगें
विहिप ने मामले में निष्पक्ष और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन के समक्ष चार प्रमुख मांगें रखी हैं।
- कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच के लिए तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए।
- चल रही जांच को तेज गति से पूरा किया जाए और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया में विलंब न हो।
- मामले की सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था की जाए ताकि समयबद्ध न्याय सुनिश्चित हो सके।
- जांच में दोषी पाए जाने वाले सभी व्यक्तियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
गबन की रकम को लेकर बढ़ रहे दावे
मामले की शुरुआत में कथित गड़बड़ी की राशि 7 से 7.5 करोड़ रुपये के बीच बताई जा रही थी। हालांकि, जांच आगे बढ़ने के साथ कई पक्षों की ओर से दावा किया जा रहा है कि अनियमितताओं का दायरा इससे कहीं बड़ा हो सकता है। आरोप है कि इसमें श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए नकद धन के अलावा सोना, चांदी और अन्य बहुमूल्य वस्तुएं भी शामिल हो सकती हैं। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
क्या है पूरा विवाद?
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन वर्ष 2020 में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद मंदिर निर्माण और उसके प्रबंधन के लिए किया गया था। हाल के दिनों में मंदिर के दान पात्रों (हुंडी) में जमा चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। इसी को लेकर जांच जारी है और विभिन्न हिंदू संगठनों की नजरें अब प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
विहिप का कहना है कि राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक है। ऐसे में मामले की पारदर्शी जांच और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जरूरी है ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे।