
डिजिटल डेस्क, नईदुनिया। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की शिकायत पर अयोध्या थाने में चढ़ावा चोरी की एफआईआर (Ram Temple Donation Fraud Update) दर्ज की गई है। इस मामले में इसे पहली बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। FIR ऐसे समय दर्ज हुई है, जब राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला गरमाया हुआ है।
राम मंदिर दान चोरी मामले में पहली बड़ी कानूनी कार्रवाई की गई है। राम जन्मभूमि ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर अयोध्या थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 306, 316 (5) और 317 (4) के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है।
एसआईटी (SIT) की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद हुए इस एक्शन में 8 लोगों को नामजद किया गया है, जिनमें मुख्य रूप से 6 कैशियर शामिल हैं। इस एफआईआर में अभी तक कोई बड़ा या प्रमुख नाम सामने नहीं आया है। FIR में अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, मनीष यादव, राजेश पाठक, रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू, अविनाश शुक्ल, करुणेश पांडेय और सुभाष श्रीवास्तव के नाम शामिल हैं।
मामले की शुरुआत 7 जून को हुई थी। समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने राम मंदिर के दानपात्र और चढ़ावे से पांच करोड़ से 7.5 करोड़ रुपये की चोरी का आरोप लगाया था।
इसी दिन अखिलेश यादव ने शाम सात बजे एक्स पर पोस्ट कर इस मामले पर टिप्पणी की थी। इसके बाद राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय ने स्पष्टीकरण जारी किया था।
8 जून को चंपत राय ने आरोपों को खारिज किया। इसी दिन मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र देर शाम अयोध्या पहुंचे और अगले दिन वापस चले गए।
9 जून को भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सीबीआई या ईडी जैसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी से जांच की मांग की।
10 जून को प्रधानमंत्री कार्यालय ने विस्तृत रिपोर्ट मांगी। इसी दिन नृपेंद्र मिश्र अयोध्या पहुंचे और चार घंटे लंबी बैठक की।
11 जून को राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व लेखापाल महिपाल सिंह का वीडियो सामने आया, जिसमें उन्होंने दावा किया कि 2021-2022 में चोरी पकड़ी गई थी और उसके फुटेज डिलीट कर दिए गए।
13 जून को ट्रस्ट के आग्रह पर जांच के लिए SIT गठित की गई।
15 जून को SIT ने ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय और आमंत्रित सदस्य गोपाल राय से जानकारी ली। आठ से 10 कर्मचारियों से करीब छह घंटे पूछताछ की गई।
16 जून को टीम ने चंपतराय और गोपाल राय से चार-चार घंटे तक सवाल किए और ट्रस्ट के 11 महीने के दस्तावेजों की जांच की।
17 जून को बैंक अधिकारियों और नोटों की गिनती से जुड़ी निजी एजेंसी के प्रतिनिधियों से पूछताछ की गई। बैंक स्टेटमेंट और वित्तीय रिकॉर्ड भी खंगाले गए।
18 जून को जांच टीम करीब 10 घंटे मंदिर परिसर में रही। डॉ. अनिल मिश्रा से चार घंटे और टिटू यादव से डेढ़ घंटे पूछताछ हुई। दोनों के जवाबों का क्रास चेक किया गया।
19 जून को चंपतराय, डॉ. अनिल मिश्रा और निर्माण प्रभारी गोपाल राय से अलग-अलग पूछताछ हुई। स्टेट बैंक के शाखा प्रबंधक और कैशियर से भी जानकारी ली गई।
20 जून को टीम ने आरोपियों और संदिग्धों के बैंक खातों की जानकारी जुटाई और सबूत लेकर लखनऊ रवाना हो गई।
23 जून को SIT ने 20 पन्नों की शुरुआती रिपोर्ट गृह विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी संजय प्रसाद को सौंपी।
25 जून को अनुकल्प मिश्र समेत आठ लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर दी गई। अब मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू हो गई है।