स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज मुकदमे को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रयागराज के झूंसी थाने में पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज मुकदमे को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका द ...और पढ़ें
Publish Date: Tue, 24 Feb 2026 05:34:02 PM (IST)Updated Date: Tue, 24 Feb 2026 05:35:08 PM (IST)
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर कीHighLights
- कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुआ मुकदमा
- अदालत ने आरोपों को बताया गंभीर
- अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोपों को झूठा बताया
डिजिटल डेस्क। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रयागराज के झूंसी थाने में पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज मुकदमे को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की है। उनके अधिवक्ता राजर्षि गुप्ता की ओर से राज्य सरकार को नोटिस भी भेजा गया है।
झूंसी पुलिस ने रविवार को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद समेत चार लोगों के खिलाफ नाबालिग बच्चों के साथ दुष्कर्म के आरोप में मुकदमा दर्ज किया था। इससे एक दिन पहले विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो कोर्ट) ने झूंसी पुलिस को प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना करने का आदेश दिया था। अदालत ने जांच निष्पक्ष, स्वतंत्र और शीघ्र पूरी करने के निर्देश दिए थे।
कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुआ मुकदमा
बताया गया है कि आशुतोष ब्रह्मचारी की ओर से पिछले महीने अदालत में अर्जी दाखिल कर मुकदमा दर्ज कराने की मांग की गई थी। अर्जी में आरोप लगाया गया कि महाकुंभ के दौरान नाबालिग लड़कों के साथ कुकर्म किया गया। अदालत ने पीड़ित बच्चों के बयान दर्ज करने के बाद पुलिस कमिश्नर से मामले की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था।
अदालत ने आरोपों को बताया गंभीर
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि पीड़ित बच्चों के बयान, स्वतंत्र साक्षियों के कथन, पुलिस कमिश्नर की जांच रिपोर्ट और अन्य संकलित सामग्री के परीक्षण से प्रथम दृष्टया गंभीर आरोप सामने आते हैं। आदेश में कहा गया कि मामले में लैंगिक उत्पीड़न के स्पष्ट आरोप हैं, जो संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आते हैं।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सभी आरोपों को झूठा बताया
वहीं, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सभी आरोपों को निराधार और झूठा बताया है। उन्होंने अपने अधिवक्ता के माध्यम से एफआईआर को हाई कोर्ट में चुनौती दी है। मामले में अगली सुनवाई की तारीख का इंतजार है।