
डिजिटल डेस्क। चित्रकूट कोषागार में सामने आए 43.13 करोड़ रुपये के पेंशन घोटाले के बाद उत्तर प्रदेश वित्त विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। विभाग ने पहली बार प्रदेश के सभी कोषागारों के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है, ताकि भविष्य में इस तरह की वित्तीय अनियमितताओं पर रोक लगाई जा सके।
घोटाले में मृत पेंशनरों के बैंक खातों का दुरुपयोग किए जाने के बाद सरकार ने पेंशन खातों में बदलाव की प्रक्रिया को और सख्त कर दिया है। अब किसी भी पेंशनर के बैंक खाते में परिवर्तन का अधिकार मुख्य कोषाधिकारी (सीटीओ) के पास नहीं रहेगा। मुख्य या वरिष्ठ कोषाधिकारी केवल संस्तुति कर सकेंगे, जबकि अंतिम मंजूरी मंडलीय अपर निदेशक से लेनी अनिवार्य होगी।
नई व्यवस्था में क्या है बदलाव
नई व्यवस्था के तहत बैंक खाता बदलने के लिए पेंशनर को आवेदन के साथ नए और पुराने बैंक खाते की स्वप्रमाणित प्रतियां जमा करनी होंगी। यदि बैंक शाखा बदली जा रही है तो पुरानी शाखा से अनापत्ति प्रमाण पत्र भी देना होगा। आवेदन मिलने के बाद पटल सहायक दस्तावेजों की जांच करेगा और फिर फाइल सहायक कोषाधिकारी व मुख्य कोषाधिकारी की संस्तुति के बाद ई-मेल के जरिए अपर निदेशक को भेजी जाएगी। उनकी मंजूरी मिलने के बाद ही खाते में कोई बदलाव संभव होगा।
प्रक्रियाओं के स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए
कोषागार निदेशक वीके सिंह ने बताया कि अब तक कोषागारों का संचालन अलग-अलग शासनादेशों के आधार पर होता था, लेकिन पहली बार सभी प्रक्रियाओं को एक व्यवस्थित एसओपी में शामिल किया गया है। इसमें पेंशन भुगतान आदेश, पारिवारिक पेंशन, जीवित प्रमाण पत्र, पेंशन अवशेष भुगतान और पहली बार पेंशन जारी करने जैसी प्रक्रियाओं के स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
चित्रकूट में क्या हुआ था घोटाला?
गौरतलब है कि चित्रकूट कोषागार में 2018 से 2025 के बीच मृत पेंशनरों के खातों में हेराफेरी कर करीब 43.13 करोड़ रुपये के घोटाले का खुलासा हुआ था। मामले में 97 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है, जिनमें 93 पेंशनर शामिल हैं। पुलिस अब तक कई आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है और करीब चार करोड़ रुपये की वसूली भी की जा चुकी है।
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