
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की योगी कैबिनेट ने बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश में माता-पिता की देखभाल न करने वाले या अत्याचार करने वाले बच्चों को अब आसानी से संपत्ति से बेदखल किया जा सकता है।
वरिष्ठ नागरिकों के सम्मानजनक जीवन और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए ‘उत्तर प्रदेश माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण नियमावली-2014’ में संशोधन करते हुए नियम 22 में नियम 22-क, 22-ख और 22-ग जोड़ने का निर्णय लिया है।
योगी कैबिनेट ने मंगलवार को इस प्रस्ताव को स्वीकृति दी है। प्रदेश में केंद्र सरकार का माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम 2007 लागू है। इसे प्रदेश में वर्ष 2012 से लागू किया गया था और वर्ष 2014 में इसकी नियमावली जारी की गई थी।
योगी कैबिनेट का अहम फैसला
पूर्व में प्रदेश में गठित राज्य सप्तम विधि आयोग ने इस नियमावली में तीन संशोधनों की सिफारिश चार दिसंबर 2020 को की थी। विधि आयोग ने वर्ष 2014 में बनी नियमावली को केंद्रीय अधिनियम के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं माना था। विधि आयोग ने नियमावली के नियम 22 में तीन और नियम 22-क, 22-ख व 22-ग बढ़ाने की सिफारिश की थी।
योगी कैबिनेट से स्वीकृत नए प्रावधानों के तहत यदि किसी भी वरिष्ठ नागरिक की संतान या उनके अन्य आश्रित रिश्तेदार उनका भरण-पोषण नहीं कर रहे हैं या उनके साथ किसी तरह का दुर्व्यवहार कर रहे हैं तो पीड़ित बुजुर्ग उन्हें अपनी संपत्ति से बेदखल कर सकेंगे।
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30 दिनों में होगी सुनवाई
ऐसे मामलों में जिला स्तरीय भरण-पोषण अधिकरण के समक्ष शिकायत की जा सकेगी और उन्हें इस प्रकार के सभी मामलों की मासिक रिपोर्ट सरकार को देनी होगी। शिकायतों की सुनवाई 30 दिन के अंदर की जाएगी, जिससे न्याय के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़े।
अगर वरिष्ठ नागरिक स्वयं आवेदन करने में असमर्थ हैं तो कोई संस्था भी उनकी ओर से ऐसा आवेदन दाखिल कर सकती है। अधिकरण को यह अधिकार होगा कि वे बेदखली का आदेश जारी कर सकें।
यदि कोई व्यक्ति आदेश जारी होने से 30 दिनों के अंदर वरिष्ठ नागरिक की संपत्ति से बेदखली आदेश को नहीं मानता है तो अधिकरण उस संपत्ति पर पुलिस की मदद से कब्जा कर सकता है।
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