गाजियाबाद की तीन बहनों की खुदकुशी से हिला प्रशासन, महिला आयोग ने कक्षा 5 तक डिजिटल असाइनमेंट भेजने पर लगाई रोक
UP News: उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबीता सिंह चौहान ने बच्चों, विशेषकर बालिकाओं में बढ़ती डिजिटल लत को एक 'गंभीर सामाजिक संकट' करार ...और पढ़ें
Publish Date: Fri, 06 Feb 2026 07:16:16 PM (IST)Updated Date: Fri, 06 Feb 2026 07:16:16 PM (IST)
महिला आयोग ने कक्षा 5 तक डिजिटल असाइनमेंट भेजने पर लगाई रोक (सांकेतिक तस्वीर)HighLights
- बच्चों में बढ़ती डिजिटल लत पर महिला आयोग ने चिंता जाहिर की है
- महिला आयोग ने कक्षा 5 तक डिजिटल असाइनमेंट भेजने पर लगाई रोक
- स्कूलों की डिजिटल मनमानी पर आयोग ने कसा शिकंजा
डिजिटल डेस्क। उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबीता सिंह चौहान ने बच्चों, विशेषकर बालिकाओं में बढ़ती डिजिटल लत को एक 'गंभीर सामाजिक संकट' करार दिया है। गाजियाबाद में मोबाइल गेमिंग की लत के कारण तीन सगी बहनों द्वारा की गई हृदयविदारक आत्महत्या की घटना पर कड़ा संज्ञान लेते हुए, उन्होंने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों (DMs) को सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
डॉ. चौहान ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि गाजियाबाद की दुखद घटना के पीछे मोबाइल गेमिंग की लत और पिता द्वारा इसका विरोध करना मुख्य कारण था। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल एक परिवार की क्षति नहीं, बल्कि पूरे समाज और शिक्षा व्यवस्था के लिए एक खतरे की घंटी है। मोबाइल की अनियंत्रित लत बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक रिश्तों को बर्बाद कर रही है।
कक्षा 5 तक डिजिटल होमवर्क पर प्रतिबंध
आयोग ने स्कूलों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि लॉकडाउन के दौरान ऑनलाइन शिक्षा मजबूरी थी, लेकिन अब सामान्य परिस्थितियों में भी होमवर्क और असाइनमेंट व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए भेजना गलत है। इससे बच्चे पढ़ाई के बहाने लगातार मोबाइल पर निर्भर हो रहे हैं। अध्यक्ष ने निर्देश दिए हैं कि कक्षा 5 तक के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में मोबाइल के जरिए होमवर्क भेजने पर तत्काल रोक लगाई जाए। शिक्षण कार्य और असाइनमेंट स्कूल परिसर में ही पूर्ण कराए जाएं। साथ ही विषम परिस्थितियों को छोड़कर बच्चों को डिजिटल कार्यों के लिए बाध्य न किया जाए।
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स्कूलों को कार्यशैली बदलनी होगी- डॉ. बबीता सिंह चौहान
डॉ. बबीता सिंह चौहान ने 'डिजिटल अनुशासन' पर जोर देते हुए कहा कि कम उम्र के बच्चे मानसिक और व्यवहारिक रूप से मोबाइल के शिकार हो रहे हैं। बच्चों के भविष्य और सुरक्षा के लिए स्कूलों को अपनी कार्यशैली बदलनी होगी ताकि उन्हें मोबाइल की निर्भरता से मुक्त कर एक स्वस्थ सामाजिक वातावरण दिया जा सके।