यूपी में दूल्हा-दुल्हन और गवाहों की पहले आधार से होगी पहचान फिर होगा विवाह का रजिस्ट्रेशन
उत्तर प्रदेश में विवाह पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए नई व्यवस्था लागू की जा रही है। ...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 02 Apr 2026 03:32:55 PM (IST)Updated Date: Thu, 02 Apr 2026 03:33:17 PM (IST)
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- आधार के बायोमीट्रिक सत्यापन के माध्यम से की जाएगी
- पहचान आइरिस स्कैन के माध्यम से की जाएगी
- वर्तमान में विवाह के बाद पंजीकरण किया जाता है
डिजिटल डेस्क। उत्तर प्रदेश में विवाह पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए नई व्यवस्था लागू की जा रही है। अब विवाह का पंजीकरण करने से पहले दूल्हा-दुल्हन और दोनों पक्षों के गवाहों की पहचान आधार कार्ड के बायोमीट्रिक सत्यापन के माध्यम से की जाएगी।
सत्यापन के बाद ही विवाह का पंजीकरण पूरा किया जाएगा। फर्जीवाड़ा रोकने और वास्तविक व्यक्तियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मुख्य सचिव के निर्देश पर यह व्यवस्था 1 अप्रैल से प्रदेश के सभी उप निबंधक कार्यालयों में लागू की जानी थी।
सभी जिलों के एआईजी निबंधन को निर्देश जारी
हालांकि तकनीकी कारणों से इसे समय पर शुरू नहीं किया जा सका, लेकिन अब इसके गुरुवार से लागू होने की संभावना जताई जा रही है। महानिरीक्षक निबंधन नेहा शर्मा ने इस संबंध में सभी जिलों के एआईजी निबंधन को निर्देश जारी कर दिए हैं।
विवाह पंजीकरण में पारदर्शिता लाने के लिए एनआईसी, लखनऊ द्वारा एक नया सॉफ्टवेयर विकसित किया गया है, जो बायोमीट्रिक प्रणाली के जरिए आधार डेटा बेस से पहचान का सत्यापन करेगा।
पहचान आइरिस स्कैन के माध्यम से की जाएगी
नई व्यवस्था के तहत, यदि किसी व्यक्ति की अंगुलियों के निशान स्कैन नहीं हो पाते हैं, तो उनकी पहचान आइरिस स्कैन के माध्यम से की जाएगी। इसी सॉफ्टवेयर के जरिए विवाह पंजीकरण के लिए ऑनलाइन आवेदन भी किया जाएगा, जिसमें पहले ओटीपी के माध्यम से आधार सत्यापन होगा और उसके बाद उप निबंधक कार्यालय में बायोमीट्रिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
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वर्तमान में विवाह के बाद पंजीकरण किया जाता है
अधिकारियों के अनुसार, मेरठ जिले के सभी छह उप निबंधक कार्यालयों में बायोमीट्रिक आरडी डिवाइस उपलब्ध करा दी गई है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश विवाह पंजीकरण नियमावली 2017 के तहत विवाह के बाद पंजीकरण किया जाता है, जिसमें दूल्हा-दुल्हन और गवाहों के पहचान पत्र, फोटो और विवाह के प्रमाण पत्र के आधार पर प्रक्रिया पूरी होती है। अलग-अलग धर्म या जाति के जोड़ों का विवाह पंजीकरण जिलाधिकारी न्यायालय में कराया जाता है।
आंकड़ों के अनुसार, जनपद के छह उप निबंधक कार्यालयों में प्रतिदिन औसतन 25 और प्रतिमाह करीब 600 विवाह पंजीकरण होते हैं। विवाह के एक वर्ष के भीतर पंजीकरण कराने पर 10 रुपये शुल्क निर्धारित है, जबकि देरी होने पर 50 रुपये प्रति वर्ष के हिसाब से शुल्क देना होता है।