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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। चीन में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बेहद सख्त फैसला सामने आया है, जहां एक वरिष्ठ अधिकारी को रिकॉर्ड तोड़ रिश्वतखोरी के मामले में मृत्युदंड की सजा सुनाई गई है। यह अधिकारी नानजिंग शहर के आर्थिक विकास विभाग में कार्यरत था, जिसकी पहचान यांग योलिन के रूप में हुई है।
अदालत ने यांग योलिन को पद के दुरुपयोग, मनी लॉन्ड्रिंग, सरकारी धन की हेराफेरी और गबन समेत कई गंभीर मामलों में दोषी करार दिया है। न्यायिक जांच में यह प्रमाणित हुआ है कि आरोपी अधिकारी ने बीते तीन दशकों (30 साल) के दौरान कुल 325 मिलियन डॉलर (लगभग 31 अरब भारतीय रुपये) की बेहिसाब रिश्वत ली थी।
यह कठोर फैसला चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग द्वारा शुरू किए गए देशव्यापी भ्रष्टाचार-विरोधी अभियान के तहत लिया गया है। हालांकि, आलोचकों का एक वर्ग इस अभियान पर सवाल भी उठाता रहा है। उनका मानना है कि इस मुहिम की आड़ में राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाया जा रहा है।
इस विशेष अभियान के इतिहास में अब तक जितने भी मामले सामने आए हैं, उनमें यांग योलिन द्वारा खाई गई घूस की यह रकम सबसे बड़ी है। अदालती दस्तावेजों के मुताबिक, यांग को विभिन्न विकास परियोजनाओं को मंजूरी देने, सरकारी जमीनों के आवंटन और वर्किंग कैपिटल (कार्यशील पूंजी) की व्यवस्था कराने के बदले में यह मोटी रकम दी गई थी।
मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी यांग योलिन ने अदालत के सामने अपना अपराध स्वीकार करते हुए गहरा पछतावा जताया। अदालत ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए यांग की पूरी निजी संपत्ति को कुर्क करने और रिश्वत की पूरी धनराशि को वापस वसूलने का आदेश जारी किया है।
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चीन में भ्रष्टाचार के संगीन मामलों में मौत की सजा सुनाए जाने का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले साल 2021 में एक सरकारी कंपनी के पूर्व पार्टी सेक्रेटरी लाई जियाओमिन को भ्रष्टाचार, गबन और बहुविवाह (एक से अधिक शादियां करने) के जुर्म में फांसी की सजा दी गई थी। वहीं वर्ष 2024 में भी इनर मंगोलिया क्षेत्र में तैनात अधिकारी ली जियानपिंग को भारी रिश्वतखोरी और वित्तीय अनियमितताओं के चलते मृत्युदंड दिया गया था।