डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को सत्ता से हटाने में क्या अमेरिका की कोई भूमिका थी? यह सवाल एक बार फिर चर्चा में है। इसकी वजह एक कथित क्लासिफाइड पाकिस्तानी राजनयिक दस्तावेज है, जिसमें दावा किया गया है कि इस्लामाबाद में इमरान खान सरकार को हटाने के लिए अमेरिका समर्थित दबाव बनाया गया था।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, 7 मार्च 2022 का यह गोपनीय डिप्लोमैटिक टेलीग्राम पाकिस्तान की उस राजनीतिक उथल-पुथल से जुड़ा है, जिसके कुछ ही हफ्तों बाद इमरान खान की सरकार गिर गई थी। इस दस्तावेज को अमेरिका की कथित संलिप्तता के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
क्या है पूरा मामला?
यह मुद्दा ऐसे समय फिर सुर्खियों में आया है, जब पाकिस्तान और अमेरिका के रिश्तों को लेकर नई बहस छिड़ी हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच क्षेत्रीय तनाव को कम करने में मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है।
पाकिस्तान में इस समय शहबाज शरीफ के नेतृत्व में सरकार है, जबकि सेना प्रमुख आसिम मुनीर देश की सैन्य व्यवस्था की कमान संभाल रहे हैं। दोनों को इमरान खान के राजनीतिक विरोधी खेमे से जोड़ा जाता है।
दस्तावेज में क्या दावा?
रिपोर्ट के अनुसार, I-0678 नंबर वाला यह दस्तावेज पाकिस्तान के तत्कालीन राजदूत असद माजीद खान ने वॉशिंगटन से इस्लामाबाद भेजा था। इसमें दक्षिण और मध्य एशिया मामलों के लिए अमेरिकी सहायक विदेश मंत्री डोनाल्ड लू के साथ हुई बैठक का जिक्र है।
दस्तावेज के मुताबिक, बैठक में अमेरिका ने इमरान खान की विदेश नीति, खासतौर पर रूस-यूक्रेन युद्ध पर पाकिस्तान के “तटस्थ रुख” को लेकर चिंता जताई थी। कथित तौर पर डोनाल्ड लू ने कहा था कि वॉशिंगटन पाकिस्तान की इस नीति से संतुष्ट नहीं है।
‘अविश्वास प्रस्ताव सफल हुआ तो सब माफ हो जाएगा’
दस्तावेज में दावा किया गया है कि डोनाल्ड लू ने संकेत दिया था कि अगर इमरान खान को अविश्वास प्रस्ताव के जरिए हटा दिया जाता है, तो अमेरिका के साथ रिश्तों में तनाव कम हो सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा, अगर प्रधानमंत्री के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव सफल हो जाता है, तो वॉशिंगटन में सब कुछ माफ कर दिया जाएगा।
रूस दौरे को प्रधानमंत्री का निजी फैसला माना जाएगा। अन्यथा आगे का रास्ता मुश्किल हो सकता है। इन टिप्पणियों को इमरान खान के प्रति अमेरिकी असंतोष के संकेत के रूप में देखा गया। खासतौर पर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ उनकी बढ़ती नजदीकियों को लेकर अमेरिका चिंतित बताया गया।
राजदूत ने भी जताई थी चिंता
रिपोर्ट में दावा है कि तत्कालीन राजदूत असद मजीद खान ने अपने विश्लेषण में लिखा था कि डोनाल्ड लू इतनी सख्त टिप्पणी व्हाइट हाउस की मंजूरी के बिना नहीं कर सकते थे। उन्होंने यह भी माना कि अमेरिकी अधिकारी ने पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति पर टिप्पणी कर कूटनीतिक सीमाओं का उल्लंघन किया।
कुछ ही हफ्तों बाद गिर गई सरकार
गौरतलब है कि दस्तावेज में वर्णित बैठक के कुछ सप्ताह बाद, 9 अप्रैल 2022 को अविश्वास प्रस्ताव के जरिए इमरान खान की सरकार गिर गई थी। इसके बाद से पाकिस्तान की राजनीति में लगातार अस्थिरता बनी हुई है।इमरान खान और उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ लगातार आरोप लगाते रहे हैं कि विदेशी ताकतों और पाकिस्तान की सैन्य व्यवस्था ने मिलकर उन्हें सत्ता से बाहर किया। हालांकि अमेरिका और पाकिस्तान की सेना इन आरोपों को पहले ही खारिज कर चुके हैं।