
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। फ्रांस के एवियन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच 16 महीने बाद द्विपक्षीय बैठक हुई। इस बैठक में किसी बड़े फैसले की घोषणा तो नहीं हुई, लेकिन रूसी तेल खरीद, टैरिफ और पाकिस्तान से जुड़े मुद्दों के कारण पिछले एक साल से दोनों देशों के बीच बने तनाव पर खुलकर बातचीत हुई।
बैठक के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत के प्रति मजबूत समर्थन दोहराया और कहा कि भारत पर कोई भी हमला करेगा तो अमेरिका मदद के लिए पहुंचेगा। हालांकि, दोनों देशों के बीच ऐसी कोई सैन्य संधि नहीं है, इसलिए इसे ट्रंप का व्यक्तिगत आश्वासन माना जा रहा है।
ट्रंप ने बैठक में प्रधानमंत्री मोदी की बार-बार तारीफ की और कहा, 'वह बेहद सख्त वार्ताकार हैं। मैं आपको एक बात बताता हूं। वह देखने में बहुत सुंदर और अच्छे लगते हैं, बिल्कुल फरिश्ते जैसे। लेकिन असल में वह बेहद कठोर हैं। वह एक किलर हैं, जितने सख्त इंसान हो सकते हैं उनमें से एक।
ट्रंप ने आगे कहा, 'उनकी शक्ल इतनी भली है कि वह आपको अचानक सरप्राइज कर देते हैं। वह भारतीयों को बहुत प्यार करते हैं, लेकिन अमेरिका को भी करते हैं।' उन्होंने मोदी को वॉशिंगटन का सबसे अच्छा मित्र कहा।
प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया युद्ध को समाप्त करने के लिए ट्रंप को धन्यवाद दिया, लेकिन साथ ही ओमान तट के पास अमेरिकी नौसेना की कार्रवाई में तीन भारतीय नाविकों की मौत और होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से उपजी समस्याओं का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया। मोदी ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए होर्मुज की खाड़ी को खुला रखना और नाविकों की सुरक्षा बेहद जरूरी है।
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दोनों नेताओं के बीच पिछली बैठक 13 फरवरी, 2025 को वाशिंगटन में हुई थी। इसके बाद रूसी तेल पर अमेरिकी टैरिफ, ट्रंप प्रशासन की टिप्पणियां, 'ऑपरेशन सिंदूर' को रुकवाने के अमेरिकी दावे और ट्रंप द्वारा पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर की तारीफ के कारण रिश्तों में खटास आ गई थी। इसके बावजूद, इस ताजा बैठक को दोनों देशों के बीच रिश्तों को 'रीसेट' करने के एक बड़े मौके के रूप में देखा जा रहा है।