मिडिल ईस्ट में भीषण तनाव, कुवैत की तेल रिफाइनरी पर ड्रोन से हमला, कई यूनिट्स में लगी आग
मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष ने अब पूरे खाड़ी क्षेत्र की ऊर्जा सुरक्षा को हिलाकर रख दिया है। शुक्रवार सुबह कुवैत की प्रमुख मीना अल-अहमदी (Mina Al-Ahmadi ...और पढ़ें
Publish Date: Fri, 20 Mar 2026 02:30:47 PM (IST)Updated Date: Fri, 20 Mar 2026 02:30:47 PM (IST)
कुवैत की बड़ी रिफाइनरी पर ड्रोन हमला।HighLights
- कुवैत की बड़ी रिफाइनरी पर ड्रोन हमला।
- कई यूनिट्स में लगी भीषण आग।
- ईरान ने दी कड़ी चेतावनी।
डिजिटल डेस्क। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष ने अब पूरे खाड़ी क्षेत्र की ऊर्जा सुरक्षा को हिलाकर रख दिया है। शुक्रवार सुबह कुवैत की प्रमुख मीना अल-अहमदी (Mina Al-Ahmadi) रिफाइनरी पर भीषण ड्रोन हमला हुआ। इस हमले के बाद रिफाइनरी की कई महत्वपूर्ण इकाइयों (Units) में आग लग गई, जिससे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।
कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (KPC) का बयान
कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस हमले की पुष्टि की है। KPC के अनुसार, हमले का समय शुक्रवार की सुबह का है। रिफाइनरी की कई यूनिट्स में आग लगी है, जिसके चलते एहतियात के तौर पर प्लांट के कुछ हिस्सों को बंद करना पड़ा है।
राहत की बात यह है कि इस घटना में अब तक किसी के घायल होने या जान जाने की खबर नहीं है। आपातकालीन टीमें सुरक्षा मानकों के तहत आग पर काबू पाने और स्थिति को नियंत्रित करने में जुटी हैं।
जवाबी हमलों का सिलसिला जारी
क्षेत्र में तनाव की शुरुआत बुधवार से और तेज हो गई है, जिसने एक खतरनाक चक्र का रूप ले लिया है। बुधवार रात इजरायल ने ईरान के 'साउथ पार्स गैस फील्ड' को निशाना बनाया। इसके जवाब में ईरान ने कतर के 'रास लफान इंडस्ट्रियल सिटी' पर हमला किया। ईरान की एक बैलिस्टिक मिसाइल ने उत्तरी इजरायल के 'हाइफा तेल रिफाइनरी' परिसर पर हमला कर भारी नुकसान पहुँचाया।
ईरान की कड़ी चेतावनी
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने इस स्थिति पर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि ईरानी बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को फिर से निशाना बनाया गया, तो ईरान अब कोई संयम नहीं बरतेगा। अराघची के अनुसार, अब तक ईरान ने अपनी शक्ति का केवल एक छोटा हिस्सा ही दिखाया है।
विशेषज्ञों की राय - खाड़ी देशों के तेल और गैस केंद्रों पर हो रहे ये हमले वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल की कीमतों पर बड़ा असर डाल सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब इस संघर्ष को रोकने के लिए कूटनीतिक दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।