US सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भारत अब कितना टैरिफ देगा? Donald Trump ने दिया जवाब
India America Trade Deal: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के ग्लोबल टैरिफ को 'अवैध' घोषित करने के ऐतिहासिक फैसले के बाद भारतीय नि ...और पढ़ें
Publish Date: Sat, 21 Feb 2026 03:35:00 PM (IST)Updated Date: Sat, 21 Feb 2026 03:35:00 PM (IST)
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के वैश्विक टैरिफ को अवैध घोषित कियाHighLights
- भारतीय निर्यातकों के लिए बड़ी राहत की खबर आई है
- भारत को अब अमेरिका को 10 प्रतिशत टैरिफ देना होगा
- अमेरिका भारी व्यापार घाटे का सामना कर रहा है
डिजिटल डेस्क। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के ग्लोबल टैरिफ को 'अवैध' घोषित करने के ऐतिहासिक फैसले के बाद भारतीय निर्यातकों के लिए बड़ी राहत की खबर आई है। 24 फरवरी 2026 से अमेरिका में निर्यात होने वाले भारतीय सामानों पर अब 50 या 18 प्रतिशत के बजाय केवल 10 प्रतिशत का अस्थायी 'इंपोर्ट सरचार्ज' लगेगा।
सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख
चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स की अध्यक्षता वाली पीठ ने 6-3 के बहुमत से ट्रंप के वैश्विक टैरिफ को गैर-कानूनी करार दिया। अदालत ने माना कि राष्ट्रपति ने अत्यधिक शुल्क लगाकर अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया है। इस फैसले के बाद ट्रंप ने एक नए घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत 24 फरवरी से 150 दिनों के लिए 10 प्रतिशत का अस्थायी शुल्क लागू होगा।
भारत पर टैरिफ का गणित
भारतीय निर्यात पर टैरिफ के उतार-चढ़ाव को इस प्रकार समझा जा सकता है, जहां अगस्त 2025 में भारत पर कुल 50% टैरिफ लगा था (25% अतिरिक्त शुल्क + रूस से तेल खरीदने पर 25% जुर्माना)। फरवरी 2026 में अंतरिम ट्रेड डील के तहत इसे घटाकर 18% किया गया। ताजा स्थिति में अब यह प्रभावी रूप से घटकर मात्र 10% रह जाएगा।
फैसले से बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन्स (FIEO) और थिंक टैंक GTRI के अनुसार, इस कटौती से भारतीय निर्यात को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी। गौरतलब है कि 2024-25 में दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार 186 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। भारत के कुल निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी लगभग 18 प्रतिशत है, जो इसे भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर बनाती है।
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अमेरिका ने क्या दिया तर्क?
ट्रंप प्रशासन ने इस 10% टैरिफ का बचाव करते हुए कहा कि अमेरिका 1.2 ट्रिलियन डॉलर के भारी व्यापार घाटे का सामना कर रहा है। उनका तर्क है कि इस अस्थायी प्रतिबंध से डॉलर के आउटफ्लो को रोकने और घरेलू विनिर्माण (Manufacturing) को प्रोत्साहित करने में मदद मिलेगी। विशेषज्ञों का सुझाव है कि बदली हुई परिस्थितियों को देखते हुए भारत को अमेरिका के साथ अपनी अंतरिम ट्रेड डील की समीक्षा फिर से करनी चाहिए।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)