गाजा शांति पहल पर भारत की मौजूदगी, ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का नहीं बना सदस्य, पहली बैठक में ऑब्जर्वर के तौर पर की भागीदारी
गाजा शांति के लिए ट्रंप की पहल ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पहली बैठक में भारत ने पर्यवेक्षक के रूप में भाग लिया। अमेरिका समेत नौ देशों ने राहत पैकेज की घोषणा की ...और पढ़ें
Publish Date: Fri, 20 Feb 2026 11:14:08 AM (IST)Updated Date: Fri, 20 Feb 2026 11:14:08 AM (IST)
‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पहली बैठक में भारत ने लिया हिस्सा। (एजेंसी)HighLights
- भारत ने पर्यवेक्षक के रूप में बैठक में भाग लिया।
- ट्रंप ने दावोस में पहल की घोषणा की।
- करीब पचास देशों के प्रतिनिधि बैठक में शामिल।
एजेंसी, नई दिल्ली। गाजा संकट को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की पहल पर गठित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पहली बैठक में भारत ने गुरुवार को पर्यवेक्षक के रूप में हिस्सा लिया।
भारत इस मंच का औपचारिक सदस्य नहीं है, लेकिन वॉशिंगटन डीसी स्थित भारतीय दूतावास की प्रभारी राजनयिक नामग्या खम्पा ने बैठक में देश का प्रतिनिधित्व किया। यह बैठक ‘डोनाल्ड जे. ट्रंप इंस्टीट्यूट ऑफ पीस’ में आयोजित हुई, जहां करीब 50 देशों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
दावोस में रखी गई थी रूपरेखा
पिछले महीने World Economic Forum के दावोस सम्मेलन में ट्रंप ने गाजा में स्थायी शांति के उद्देश्य से ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की अवधारणा प्रस्तुत की थी। उन्होंने दावा किया था कि यह मंच भविष्य में संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाओं को चुनौती दे सकता है। इसके बाद अमेरिका ने कई देशों को औपचारिक निमंत्रण भेजा, जिसमें भारत भी शामिल है।
50 देशों की भागीदारी, भारत पर्यवेक्षक
- वॉशिंगटन स्थित United States Institute of Peace में हुई बैठक में 27 सदस्य देशों समेत लगभग 50 देशों ने भाग लिया। सदस्य देशों में अजरबैजान, मिस्र, इजराइल, जॉर्डन, सऊदी अरब, यूएई और पाकिस्तान जैसे देश शामिल हैं, जबकि भारत और यूरोपीय संघ ने पर्यवेक्षक के रूप में उपस्थिति दर्ज कराई।
- विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पहले ही स्पष्ट किया था कि भारत को शामिल होने का निमंत्रण मिला है और इस प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा था कि भारत पश्चिम एशिया में दीर्घकालिक और स्थायी शांति के हर प्रयास का समर्थन करता है।
7 अरब डॉलर राहत पैकेज की घोषणा
- बैठक के दौरान ट्रंप ने बताया कि नौ सदस्य देशों ने गाजा के लिए कुल 7 अरब डॉलर के राहत पैकेज पर सहमति दी है। साथ ही अमेरिका ने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के लिए 10 अरब डॉलर देने की घोषणा की, हालांकि इन फंड्स के उपयोग का विस्तृत खाका स्पष्ट नहीं किया गया।
- भारत की पर्यवेक्षक के रूप में भागीदारी को कूटनीतिक संकेत माना जा रहा है कि वह पहल के साथ संवाद बनाए रखना चाहता है, भले ही फिलहाल पूर्ण सदस्यता पर अंतिम निर्णय शेष हो।