
डिजिटल डेस्क, नईदुनिया। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRCG) ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अस्थायी रूप से बंद करने की घोषणा की है। आईआरजीसी ने इस कदम के पीछे अमेरिकी हस्तक्षेप को कारण बताया है। संगठन का दावा है कि एक जहाज निर्धारित अनुमति के बिना इस मार्ग से गुजरने की कोशिश कर रहा था, जिस पर चेतावनी स्वरूप गोली चलाई गई। इसके बाद होर्मुज जलडमरूमध्य को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया।
अमेरिकी सेना का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे एक व्यापारी जहाज पर हुए हमले के बाद उसने रविवार तड़के ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी। इस घटनाक्रम ने पहले से जारी दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है।
रॉयटर्स के अनुसार, सरकारी मीडिया आउटलेट आईआरआईबी ने बंदर अब्बास और सिरिक में विस्फोटों की जानकारी दी है। वहीं, मेहर न्यूज एजेंसी ने बताया कि केशम द्वीप पर भी धमाकों की आवाजें सुनी गईं।
ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह मोजतबा खामेनेई ने अपने पिता अली खामेनेई की हत्या का बदला लेने की शपथ ली है। उन्होंने कहा कि बदला लेना पूरे राष्ट्र की इच्छा है। इस बयान को क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, रविवार तड़के दक्षिणी ईरानी शहरों बुशहर और असलुयेह में विस्फोटों की सूचना मिली। वहीं, रॉयटर्स के मुताबिक आईआरआईबी ने बंदर अब्बास और सिरिक में विस्फोट होने की जानकारी दी, जबकि मेहर न्यूज एजेंसी ने केशम द्वीप पर धमाकों की आवाज सुनाई देने की बात कही।
उल्लेखनीय है कि ईरान का परमाणु ऊर्जा संयंत्र बुशहर शहर के बाहरी इलाके में स्थित है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इस संयंत्र को किसी प्रकार के नुकसान की पुष्टि नहीं की गई है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल निर्यात का बड़ा हिस्सा इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। ऐसे में इसके अस्थायी रूप से बंद होने से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री शिपिंग पर व्यापक असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
ईरान और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए समझौते (एमओयू) के बावजूद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बना हुआ है। ईरान का आरोप है कि अमेरिका का हस्तक्षेप और इजराइल की गाजा तथा लेबनान में की जा रही कार्रवाइयां इस समझौते की भावना के विपरीत हैं। मौजूदा घटनाक्रम ने यह संकेत दिया है कि क्षेत्र में हालात अभी भी बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।