
डिजिटल डेस्क। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए जा रहे हमलों के बाद मध्य-पूर्व में हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। हमलों के बीच ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर ने भू-राजनीतिक समीकरण और जटिल कर दिए हैं। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने इजरायल के साथ-साथ सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, ओमान और कुवैत जैसे देशों की ओर मिसाइलें दागीं, जिससे क्षेत्रीय संकट और गहरा गया।
इस टकराव ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में सवाल उठता है कि कभी सहयोगी रहे ईरान और इजरायल के रिश्ते आखिर दुश्मनी में कैसे बदल गए?
दोस्ती से टकराव तक का सफर
1948 में इजरायल के गठन के बाद तुर्की के पश्चात ईरान दूसरा मुस्लिम बहुल देश था जिसने उसे मान्यता दी। उस समय ईरान में पहलवी वंश का शासन था और वह अमेरिका का करीबी सहयोगी माना जाता था। इजरायल के संस्थापक डेविड बेन-गुरियन ने अरब देशों के विरोध के बावजूद ईरान से संबंध मजबूत किए। हालांकि ईरान ने फिलिस्तीन विभाजन योजना का विरोध किया था, फिर भी दोनों देशों के बीच रणनीतिक रिश्ते कायम रहे।
1979 की इस्लामिक क्रांति बना मोड़
साल 1979 में अयातुल्लाह खुमैनी के नेतृत्व में हुई इस्लामिक क्रांति ने पूरे समीकरण बदल दिए। शाह की सत्ता समाप्त हुई और इस्लामी गणराज्य की स्थापना हुई। नई सरकार ने अमेरिका और इजरायल को ‘साम्राज्यवादी ताकत’ बताते हुए संबंध तोड़ लिए। तेहरान स्थित इजरायली दूतावास फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन (पीएलओ) को सौंप दिया गया और इजरायल विरोध ईरान की विदेश नीति का अहम हिस्सा बन गया।
फिलिस्तीन मुद्दा और बढ़ती खाई
ईरान ने खुद को फिलिस्तीनियों का समर्थक बताते हुए इस मुद्दे को वैश्विक मंच पर जोर-शोर से उठाया। कई ईरानी नेता लेबनान में गुरिल्ला संघर्षों से जुड़े रहे, जिससे इजरायल विरोध और तीखा हुआ। दूसरी ओर, 1990 के दशक तक इजरायल के लिए इराक बड़ा खतरा था, लेकिन बाद में उसने ईरान को अपने अस्तित्व के लिए चुनौती मानना शुरू कर दिया।
शैडो वॉर और परमाणु विवाद
ईरान ने ‘एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस’ के तहत हिजबुल्लाह जैसे संगठनों का नेटवर्क खड़ा किया, जिसे इजरायल अपनी सुरक्षा के लिए खतरा मानता है। दोनों देशों के बीच वर्षों से ‘शैडो वॉर’ चलती रही है, जिसमें प्रत्यक्ष युद्ध के बजाय गुप्त अभियानों और साइबर हमलों का सहारा लिया गया।
इजरायल का प्रमुख लक्ष्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकना रहा है। स्टक्सनेट वायरस से ईरानी परमाणु प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचाया गया। वहीं, 2020 में परमाणु वैज्ञानिक मोहसिन फखरीजादेह की हत्या के लिए ईरान ने इजरायल को जिम्मेदार ठहराया था।
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