
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। नेपाल के रसुवा जिले में तिब्बत सीमा के पास बुधवार को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड (Nepal Flash Flood Update) ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी। बाढ़ और मलबे के कारण अब तक चीन में तीन लोगों समेत लगभग 160 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। करीब 844 लोग लापता बताए जा रहे हैं, जिनमें लगभग 133 भारतीय और 37 अनिवासी भारतीय शामिल हैं। लापता भारतीयों में बड़ी संख्या कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तीर्थयात्रियों की है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से फोन पर बातचीत कर इस प्राकृतिक आपदा में हुई जनहानि पर संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि भारत नेपाल को हर संभव मानवीय सहायता देने के लिए तैयार है। भारत की ओर से राहत सामग्री भारतीय वायुसेना के विमानों के जरिए भेजी जा रही है और एनडीआरएफ की टीमों को भी तैनात किया गया है। नेपाल ने प्रधानमंत्री मोदी के सहयोग और संवेदना के लिए आभार जताया है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रभावित और लापता लोगों के संबंध में जानकारी के लिए 1070 हेल्पलाइन सक्रिय की है। भारतीय दूतावास, चीन ने तिब्बत-नेपाल सीमा पर फंसे भारतीय नागरिकों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। महाराष्ट्र ने भी राज्य के पर्यटकों की जानकारी जुटाने के लिए डेटा लिंक शुरू किया है।
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद को बताया कि स्थानीय समयानुसार सुबह 8:37 बजे तिब्बत क्षेत्र में भूकंप आया था। इसके करीब तीन मिनट बाद अचानक बाढ़ आने की सूचना मिली। इससे आशंका जताई जा रही है कि भूकंप के झटकों के कारण हिमनद फटने जैसी घटना हुई होगी, जिसके बाद बाढ़ आई।

जर्मन रिसर्च सेंटर फार जियोसाइंसेज (जीएफजेड) के अनुसार, बाढ़ आने से करीब सात मिनट पहले 4.4 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) ने प्लैनेट लैब्स की शुरुआती सैटेलाइट तस्वीरों के अध्ययन के आधार पर बताया कि लेंडे नदी में बर्फ और चट्टानों के खिसकने से मलबे वाली बाढ़ आई।
अधिकारियों के अनुसार, भोटेकोशी नदी में अचानक बाढ़ आने से नेपाल के तिब्बत सीमा से लगे रसुवा और धादिंग जिले सबसे अधिक प्रभावित हुए। नेपाल-तिब्बत सीमा पर स्थित लेंडे नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद तिमुरे में भोटेकोशी के रास्ते बाढ़ का पानी और मलबा त्रिशूली नदी तक पहुंच गया।

इसके बाद बाढ़ नुवाकोट, चितवन, गोरखा, तनहुं और नवलपरासी जिलों तक फैल गई। काठमांडू से करीब 70 से 200 किलोमीटर दूर तक के इलाकों में भी इसका असर देखा गया। प्लैनेट लैब्स की पहले और बाद की सैटेलाइट तस्वीरों में नदी के सामान्य मार्ग के दोनों तरफ बड़े पैमाने पर नुकसान दिखाई दिया।
प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की अध्यक्षता में हुई आपात बैठक के बाद नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस के जवानों को प्रभावित क्षेत्रों में बचाव और राहत कार्यों के लिए भेजा गया। नेपाली सेना ने अभियान के लिए 12 हेलीकॉप्टर तैनात किए हैं। सुरक्षा बलों ने अलग-अलग स्थानों पर फंसे 100 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला है।
रसुवा के स्याप्रु बेसी और तिमुरे में हालात इतने कठिन हैं कि बचाव हेलीकॉप्टर भी उतर नहीं पा रहे हैं। करीब 50,000 की आबादी वाले इस जिले में राहत कार्यों में कई चुनौतियां सामने आ रही हैं। नेपाल सेना ने त्रिशूली स्थित मिलिट्री ट्रेनिंग सेंटर नंबर-1 में चिकित्सा केंद्र बनाया है। सेना का एक एमआइ-17 हेलीकॉप्टर त्रिशूली जिला अस्पताल की मदद के लिए भेजा गया है।
नेपाल के बाढ़ पूर्वानुमान प्रभाग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर बताया कि नदी के अवरुद्ध होने के स्थान पर बनी झील का पानी अभी पूरी तरह बाहर नहीं निकला है। ऐसे में भोटेकोशी और त्रिशूली नदी क्षेत्रों में खतरा बना हुआ है।
प्रभाग ने लोगों से नदियों से दूर रहने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है। एनडीआरआरएमए ने रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, चितवन और गोरखा में नदी किनारे रहने वाले लोगों को अगली सूचना तक सतर्क रहने तथा आवश्यक सुरक्षा उपाय अपनाने को कहा है।
नेपाल के गृह मंत्रालय के अनुसार, लापता करीब 750 लोगों में लगभग 265 लोग चीन की तरफ के बताए जा रहे हैं। नेपाल में लापता लोगों में करीब 133 भारतीय और 37 अनिवासी भारतीय शामिल हैं। इनमें 37 लोग तमिलनाडु के रहने वाले हैं। कम से कम 50 भारतीय कैलाश मानसरोवर तीर्थयात्री थे।
ईशा फाउंडेशन के अनुसार, उसके सेंटर से जुड़े 77 लोग लापता हैं और ये लोग इमीग्रेशन सेंटर पर मौजूद थे। वहीं 495 लोग सुरक्षित लौट चुके हैं। नेपाली सेना के 44 जवानों समेत 80 सुरक्षाकर्मी भी लापता बताए गए हैं।
नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार, लापता लोगों में अमेरिका के तीन और ब्रिटेन के 12 पर्यटकों के अलावा मलेशिया, ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और नीदरलैंड समेत दो दर्जन देशों के नागरिक शामिल हैं।
बाढ़ से नुवाकोट और रसुवा जिलों में कुल 354 मेगावाट क्षमता वाली आठ चालू जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। इसके अलावा पांच निर्माणाधीन परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा है।
इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन नेपाल (आईपीपीएएन) के मुताबिक प्रभावित परियोजनाओं में रसुवागढ़ी जलविद्युत परियोजना की 111 मेगावाट, संजेन खोला जलविद्युत परियोजना की 78 मेगावाट और अपर त्रिशूली-3ए की 60 मेगावाट क्षमता वाली परियोजनाएं शामिल हैं। नेपाल सरकार के अनुसार बाढ़ में 19 मोटरेबल पुल भी बह गए हैं।
‘द काठमांडू पोस्ट’ के अनुसार, भोटेकोशी नदी की बाढ़ ने नुवाकोट के बेत्रावती को रसुवा के रसुवागढ़ी सीमा चौकी से जोड़ने वाली 42 किलोमीटर लंबी सड़क को बहा दिया। कई जगह सड़कें पूरी तरह नष्ट हो गईं और कंक्रीट के कई पुल भी बाढ़ में बह गए।
उत्तरगया ग्रामीण नगरपालिका की उपाध्यक्ष चामेली गुरूंग के मुताबिक स्याफ्रूबेसी, बेत्रावती, मेलुंग, सल्लेटार, शांतिबाजार, पैरेबेसी, खल्ती बस्ती, सोले, त्रिशूली और बट्टार समेत करीब एक दर्जन बस्तियां प्रभावित हुई हैं।
फ्लैश फ्लड के बाद भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों के किनारे स्थित इलाकों से तबाही के कई वीडियो सामने आए। रसुवागढ़ी में रिकॉर्ड वीडियो में तेज बहाव के साथ पानी और मलबे की विशाल लहर दिखाई दी। कई जगह इमारतें, वाहन और पुल बाढ़ की चपेट में आ गए।
एक वीडियो में चार मंजिला इमारत के उफनते पानी में बहने का दृश्य दिखाई दिया, जबकि दूसरे वीडियो में तेज बहाव में एक कार तैरती नजर आई। एक अन्य वीडियो में बाढ़ के दबाव से लंबा पुल टूटकर दो हिस्सों में बिखरता दिखा। धादिंग जिले के वीडियो में भी बाढ़ का पानी पुल से टकराने के बाद उसे बहाकर ले जाता दिखाई दिया।
चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, तिब्बत में आई बाढ़ से गिरोंग काउंटी का गिरोंग पोर्ट प्रभावित हुआ है। शिगात्से इलाके में सड़क, संचार और बिजली व्यवस्था बाधित हुई है। ड्रोन फुटेज में बंदरगाह की कुछ इमारतें मलबे में दबी दिखाई दीं।
एकअर्कालाई सहयोग गरौं।
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— Nepal Police (@NepalPoliceHQ) August 26, 2026
चीनी मीडिया के मुताबिक बचाव अभियान के लिए 601 कर्मचारी और 113 वाहन लगाए गए हैं। खोजी कुत्तों और बचाव उपकरणों को भी भेजा गया है। एक बचावकर्मी ने बताया कि ड्रोन से शुरुआती जांच में सीमा तक जाने वाली सभी सड़कें पूरी तरह क्षतिग्रस्त मिलीं।
लगातार बारिश के कारण पानी का स्तर फिर बढ़ने की आशंका है। चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने लापता लोगों की तलाश और बचाव के लिए हरसंभव प्रयास करने का आदेश दिया है। उन्होंने निगरानी और शुरुआती चेतावनी व्यवस्था मजबूत करने तथा वैज्ञानिक तरीके से बचाव अभियान चलाने पर जोर दिया है।
भोटेकोशी नदी में पिछले साल भी दो बार विनाशकारी बाढ़ आई थी। उस दौरान रसुवा में भारी नुकसान हुआ था और कम से कम 10 लोगों की मौत हुई थी। इस बार की आपदा ने 2013 में उत्तराखंड की केदारनाथ घाटी में आई जलप्रलय की यादें ताजा कर दी हैं।
नेपाल में बाढ़ के चलते उत्तर प्रदेश और बिहार के कई जिलों में भी बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। दोनों राज्यों को अलर्ट पर रखा गया है।