चीन भी नहीं आया पाकिस्तान के काम... 8 अरब डॉलर का निवेश डूबा, 5 लाख नौकरियों का सपना टूटा
पाकिस्तान के निवेश मंत्री कैसर अहमद शेख ने एक बड़ा स्वीकारोक्ति करते हुए कहा है कि वर्ष 2018 से 2024 के बीच देश ने लगभग आठ अरब डॉलर का विदेशी निवेश और ...और पढ़ें
Publish Date: Sun, 10 May 2026 03:24:28 PM (IST)Updated Date: Sun, 10 May 2026 03:35:04 PM (IST)
चीन भी नहीं पाकिस्तान के कामHighLights
- 8 अरब डॉलर का निवेश डूबा और 5 लाख नौकरियां हाथ से निकलीं
- बुनियादी ढांचे की कमी से अधूरे रहे विशेष आर्थिक क्षेत्र
- स्थिरता न होने से वियतनाम और बांग्लादेश से पिछड़ा पाक
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पाकिस्तान की जर्जर अर्थव्यवस्था और सरकारों के खोखले दावों की पोल अब खुद वहां के मंत्री ही खोलने लगे हैं। पाकिस्तान के निवेश मंत्री कैसर अहमद शेख ने एक बड़ा स्वीकारोक्ति करते हुए कहा है कि वर्ष 2018 से 2024 के बीच देश ने लगभग आठ अरब डॉलर का विदेशी निवेश और करीब पांच लाख औद्योगिक नौकरियों के अवसर गंवा दिए हैं।
CPEC: 'गेम चेंजर' से 'कर्ज का जाल' तक का सफर
पाकिस्तानी अखबार 'डॉन' की रिपोर्ट के अनुसार, जिस चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) को कभी अर्थव्यवस्था के लिए 'गेम चेंजर' बताया गया था, वह अब कर्ज और विफलता का प्रतीक बन चुका है। रिपोर्ट में इसे लगातार विफल रही सरकारों की बड़ी नाकामी करार दिया गया है। पाकिस्तान ने चीन से भारी कर्ज लेकर सड़कें और ऊर्जा परियोजनाएं तो शुरू कीं, लेकिन उद्योगों के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा विकसित करने में पूरी तरह नाकाम रहा।
विशेष आर्थिक क्षेत्रों (SEZs) की सुस्त रफ्तार
चीन की निजी कंपनियों को आकर्षित करने के लिए बनाए जाने वाले 'विशेष आर्थिक क्षेत्र' एक दशक बाद भी अधूरे पड़े हैं। योजना के अनुसार प्रस्तावित क्षेत्रों में से केवल चार ही शुरुआती स्तर से आगे बढ़ पाए हैं। यही कारण है कि चीन की निजी कंपनियों ने पाकिस्तान में कारखाने लगाने से परहेज किया। जो इक्का-दुक्का कंपनियां आईं भी, उन्होंने निर्यात के बजाय केवल पाकिस्तान के स्थानीय बाजार पर ध्यान केंद्रित किया, जिससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार को कोई लाभ नहीं हुआ।
नीतिगत विफलता और टूटता भरोसा
रिपोर्ट में पाकिस्तान के नीति निर्माताओं को आईना दिखाते हुए कहा गया है कि निवेशकों का भरोसा लगातार टूट रहा है। पाकिस्तान के पास वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों की तरह बेहतर माहौल बनाने का मौका था, लेकिन वह राजनीतिक अस्थिरता, आतंकवाद और भ्रष्टाचार के दलदल में उलझा रहा।