पाकिस्तान में महंगाई का 'डबल अटैक'... पेट्रोल के बाद अब महंगी हुई बिजली, जनता पर पड़ेगा अरबों का बोझ
ईंधन की कीमतों में आए बदलावों और मासिक ईंधन लागत सुधार (Monthly Fuel Cost Adjustment) के नाम पर बिजली की दरों में 1.42 रुपये प्रति यूनिट की बढ़ोतरी कर ...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 13 Apr 2026 04:15:15 PM (IST)Updated Date: Mon, 13 Apr 2026 04:15:15 PM (IST)
पाकिस्तान में पेट्रोल के बाद महंगी हुई बिजलीHighLights
- बिजली की दरों में 1.42 रुपये प्रति यूनिट की मासिक बढ़ोतरी की गई
- उपभोक्ताओं पर अप्रैल के बिलों में 10.57 अरब रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा
- FPCCI ने औद्योगिक क्षेत्र की स्थिरता को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की
डिजिटल डेस्क। पाकिस्तान की नेशनल इलेक्ट्रिक पावर रेगुलेटरी अथॉरिटी (NEPRA) ने देशवासियों को एक और बड़ा झटका दिया है। ईंधन की कीमतों में आए बदलावों और मासिक ईंधन लागत सुधार (Monthly Fuel Cost Adjustment) के नाम पर बिजली की दरों में 1.42 रुपये प्रति यूनिट की बढ़ोतरी कर दी गई है।
अप्रैल के बिलों में दिखेगा असर
फरवरी 2026 के लिए किए गए इस समायोजन का सीधा असर उपभोक्ताओं के अप्रैल महीने के बिल पर पड़ेगा। 'द न्यूज इंटरनेशनल' की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बढ़ोतरी से पाकिस्तान की जनता पर कुल मिलाकर करीब 10.57 अरब रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा।
महंगाई के चक्रव्यूह में फंसी जनता
चौतरफा मार: मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष और वैश्विक ऊर्जा अनिश्चितता के कारण सरकार ने किफायत के उपाय किए हैं। लेकिन हकीकत यह है कि पेट्रोल पंप हो या घर की रसोई, पाकिस्तानी नागरिकों के लिए महंगाई से बचने का कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा है।
भविष्य की चिंता: विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे आने वाले समय में ईंधन और बिजली के रेट और भी बढ़ सकते हैं।
उद्योगों पर गहराता संकट
पाकिस्तान का औद्योगिक क्षेत्र पहले से ही वेंटिलेटर पर है। फेडरेशन ऑफ पाकिस्तान चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FPCCI) ने चेतावनी दी है कि...
- पिछले तीन वर्षों में उद्योगों पर पहले ही 564.7 अरब रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ चुका है।
- बिजली दरों में यह नई बढ़ोतरी उद्योगों की स्थिरता को पूरी तरह खत्म कर सकती है, जिससे उत्पादन और रोजगार पर बुरा असर पड़ेगा।
सिस्टम की विफलता और भारी नुकसान
पाकिस्तान की बिजली समस्या सिर्फ वैश्विक संकट का नतीजा नहीं है, बल्कि आंतरिक खामियां भी जिम्मेदार हैं...
- वितरण घाटा: वित्त वर्ष 2024-25 में ट्रांसमिशन और वितरण के दौरान होने वाले नुकसान और बिजली चोरी ने विभाग को खोखला कर दिया है।
- 397 अरब का घाटा: बिल वसूली में कमजोरी और तकनीकी खामियों के कारण पाकिस्तान के बिजली वितरण क्षेत्र को कुल 397 अरब रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ा था, जिसकी भरपाई अब जनता की जेब से की जा रही है।