अमेरिका-ईरान की जंग खत्म होने पर मुहर, ट्रंप और पेजेशकियान ने साइन की डील; अब खुलेगा होर्मुज
अमेरिका और ईरान ने ऐतिहासिक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए। समझौते के तहत शत्रुता समाप्त होगी और होर्मुज जलडमरूमध्य वाणिज्यिक जहाजों के लिए फिर से खोला ...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 18 Jun 2026 09:07:57 AM (IST)Updated Date: Thu, 18 Jun 2026 09:19:51 AM (IST)
अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा तनाव खत्म। (फोटो- सोशल मीडिया)HighLights
- ट्रंप और पेजेशकियान ने ऐतिहासिक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए।
- जी-7 सम्मेलन में वर्साय पैलेस में समझौता हुआ अंतिम।
- ईरान ने डिजिटल हस्ताक्षरों से समझौते की पुष्टि की।
डिजिटल डेस्क। अमेरिका और ईरान के बीच चले आ रहे तनाव को खत्म करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। ये एक एतिहासिक फैसला है, क्योंकि दोनों देशों के बीच चल रहे तनाव की वजह से दुनिया भर को आर्थिक नुकसान उठाने पड़ रहे थे।
- जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान फ्रांस के वर्साय पैलेस में इस समझौते को अंतिम रूप दिया गया। समझौते के प्रभावी होने के साथ ही दोनों देशों के बीच जारी तनाव पर तत्काल विराम लग गया है। सबसे जरूरी होर्मुज जलडमरूमध्य को कमर्शियल जहाजों के लिए फिर से खोला जाएगा।
यह समझौता मध्य-पूर्व में फिर से शांति लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से जारी सैन्य और कूटनीतिक तनाव के बीच यह पहला ऐसा बड़ा औपचारिक कदम है, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल आपूर्ति पर पड़ रहे दबाव में कमी आने की उम्मीद है। ![naidunia_image]()
वर्साय पैलेस में हुए हस्ताक्षर
फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने एक वीडियो साझा किया, जिसमें डोनाल्ड ट्रंप वर्साय पैलेस में समझौते पर हस्ताक्षर करते दिखे। ट्रंप ने कहा कि ईरान-अमेरिका के बीच समझौते पर हस्ताक्षर हो चुके हैं। यह आसान नहीं था, लेकिन हमने इसे पूरा कर लिया है।
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होर्मुज जलडमरूमध्य फिर खुलेगा
समझौते का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से कमर्शियल जहाजों के लिए खोलना है। यह जलमार्ग दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है। इसके खुलने से वैश्विक तेल और व्यापारिक परिवहन को राहत मिलने की संभावना है।
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आगे क्या होगा
हालांकि समझौता लागू हो चुका है, लेकिन दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों के बीच आगे भी मुलाकाते होती रहेंगी। इन बातचीतों से परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सहमति बनाई जाएगी। विशेषज्ञों का मानें तो यह समझौता भविष्य में स्थायी शांति की नींव बन सकता है।