
डिजिटल डेस्क, नईदुनिया। युगांडा के गॉडफ्रे बागूमा (Godfrey Baguma) को दुनिया के सबसे बदसूरत इंसान के रूप में पहचाना जाता है, लेकिन उनकी कहानी सिर्फ उनके रूप तक सीमित नहीं है। दुर्लभ आनुवांशिक बीमारी से जूझने के बावजूद उन्होंने जिंदगी में हार नहीं मानी और आज वह एक सफल गायक और स्टैंड-अप कॉमेडियन के तौर पर अपनी पहचान बना चुके हैं।
साल 2002 में युगांडा में आयोजित एक प्रतियोगिता में गॉडफ्रे बागूमा ने "दुनिया के सबसे बदसूरत इंसान" का खिताब जीता था। उन्हें 'सेसाबी' नाम से भी जाना जाता है। शुरुआत में यह पहचान उनके लिए मुश्किलों से भरी थी, लेकिन बाद में यही खिताब उनके आत्मविश्वास को वापस लाने का कारण बना।
गॉडफ्रे बागूमा फाइब्रोडिस्प्लेसिया ओसिफिकन्स प्रोग्रेसिवा (एफओपी) नामक दुर्लभ और दर्दनाक आनुवांशिक बीमारी से पीड़ित हैं। इस बीमारी को "स्टोन मैन सिंड्रोम" के नाम से भी जाना जाता है। यह दुनिया की सबसे दुर्लभ आनुवांशिक बीमारियों में शामिल है और लगभग दस लाख लोगों में से एक व्यक्ति को प्रभावित करती है।
एफओपी बीमारी में शरीर की मांसपेशियां, टेंडन, स्नायु और संयोजी ऊतक धीरे-धीरे हड्डियों में बदलने लगते हैं। आमतौर पर इसकी शुरुआत गर्दन और कंधों से होती है और धीरे-धीरे यह शरीर के अन्य हिस्सों तक फैल सकती है। इससे मरीज के लिए चलना-फिरना, खाना और बोलना कठिन हो सकता है।
महज 10 साल की उम्र में बागूमा के गालों पर असामान्य सूजन दिखाई देने लगी थी। उन्हें बचपन में लोगों के ताने भी सुनने पड़े। गांव में कई लोग उन्हें "गोरिल्ला" और "कुत्ते के सिर वाला" कहकर चिढ़ाते थे, लेकिन उन्होंने इन बातों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया।
वयस्क होने के बाद युगांडा के म्बारा अस्पताल के डॉक्टरों ने उनका एमआरआई स्कैन किया, जिससे बीमारी की जानकारी मिली। बागूमा ने अपनी जिंदगी को आगे बढ़ाने के लिए संगीत का सहारा लिया। बाद में वह स्थानीय गायक और स्टैंड-अप कॉमेडियन बने। TLC के 'मोस्ट एक्सट्रीम ह्यूमन्स' कार्यक्रम में नजर आए बागूमा ने बताया था कि इस खिताब ने उनका खोया आत्मविश्वास लौटाया और उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
गॉडफ्रे बागूमा की शादी नमांडे केट से हुई है। उनके छह बच्चे हैं, जबकि पिछले रिश्ते से भी उनके दो बच्चे हैं। आज 56 वर्षीय बागूमा अपनी बीमारी और दर्द के बावजूद दूसरों को हंसाने का काम करते हैं।
एफओपी बीमारी का अभी कोई इलाज नहीं है, लेकिन बागूमा की जिंदगी यह संदेश देती है कि इंसान की पहचान उसके बाहरी रूप से नहीं, बल्कि उसके संघर्ष और जज्बे से होती है।